एमवीएल बिल्डर बना गुड़गांव का नीरव मोदी

Edited By Rakhi Yadav, Updated: 06 Oct, 2018 12:17 PM

gurgaon s neerav modi makes mvl builder

एक ओर सरकार रियल एस्टेट में पारदर्शिता का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ आए दिन खरीदारों के हजारों करोड़ रुपए हड़पने के मामले भी सामने आ रहे हैं। सैकड़ों खरीदारों ने आज एमवीएल बिल्डर के कारपोरेट ऑफिस....

गुडग़ांव(ब्यूरो): एक ओर सरकार रियल एस्टेट में पारदर्शिता का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ आए दिन खरीदारों के हजारों करोड़ रुपए हड़पने के मामले भी सामने आ रहे हैं। सैकड़ों खरीदारों ने आज एमवीएल बिल्डर के कारपोरेट ऑफिस पर ही प्रदर्शन करके अपने जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई के डूबने का मातम मनाया और बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन किया। खरीदारों का कहना है कि एमवीएल बिल्डर को न्यायालय की तरफ से दिवालिया घोषित किया जा चुका है और सभी बैंकों ने भी अपने पैसे की वसूली के लिए बिल्डर के चारों प्रोजेक्ट के नीलामी की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में हजारों करोड़ जिन खरीदारों के इस बिल्डर के पास हैं, उनका क्या होगा जो गत दशक भर से आवास की आस लगाए बैठे हैं। 

यदि बिल्डर के चारों प्रोजेक्ट को मिलाकर देखा जाए तो करीब 600 खरीदारों अब लुटे हुए महसूस कर रहे हैं। जिनमें की आईबीसी प्रोजेक्ट गुडग़ांव के सेक्टर 35 में स्थित है, जिसमे खरीदारों की संख्या करीब 200 से अधिक है। तो वहीं इंडी होम्स भिवाड़ी में बिल्डर ने एलआईजी श्रेणी में निर्मित किया, जिसमें करीब 250 से अधिक लोगों ने प्रति फ्लैट 10 लाख रुपए जमा किए हैं। 

गौरतलब है कि इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट करीब 10 साल पहले शुरू किए गए थे, लेकिन खरीदारों को आज तक उनका आवास नहीं मिला। जबकि एमवीएल बिल्डर का फ्लोरा प्रोजेक्ट सर्वाधिक महंगा बताया जाता है, जिसमें खरीदारों ने प्रति आवास दो करोड़ रुपए तक जमा कर रखे हैं। औसतन इन चारों प्रोजेक्ट में खरीदारों के हजार  करोड़ रुपए अधर में लटक गए हैं। दूसरी तरफ बिल्डर को अदालत की ओर से दिवालिया घोषित किया जा चुका है। ऐसे में अहम सवाल बन गया है कि खरीदारों के साथ न्याय कौन करेगा। 

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