Farmers News: हरियाणा में धान छोड़कर दूसरी फसल उगाने वाले किसान 68% घटे, सामने आई बड़ी वजह

Edited By Isha, Updated: 21 Jan, 2026 02:06 PM

number of farmers in haryana who switched from growing paddy to other crops has

हरियाणा में धान के सीजन में पानी बचाने के लिए शुरू की गई योजना 'मेरा पानी मेरी विरासत' का दायरा 5 वर्ष में 69% घट गया। 2020 में शुरू हुई योजना के तहत पहले साल 64 हजार एकड़ में धान को छोड़कर दूसरी

चंडीगढ़: हरियाणा में धान के सीजन में पानी बचाने के लिए शुरू की गई योजना 'मेरा पानी मेरी विरासत' का दायरा 5 वर्ष में 69% घट गया। 2020 में शुरू हुई योजना के तहत पहले साल 64 हजार एकड़ में धान को छोड़कर दूसरी फसलें उगाई गई थीं, पर 2025 में यह रकबा घटकर 19 हजार 656 एकड़ रह गया। इस योजना को अपनाने वाले किसानों की संख्या 68% घट गई। यह 41,947 से घटकर 13,500 पर आ गई। 2024 में हालात सबसे खराब रहे।

तब 4,118 किसानों ने ही सिर्फ 4,506 एकड़ रकबे को योजना में शामिल कराया। योजना में शामिल होकर 1.59 लाख किसानों ने 850 करोड़ लीटर पानी बचाया। हालांकि, 2020 में पानी की जो बचत 226.56 करोड़ लीटर हुई थी, वो 2025 में 73.26% घटकर 60.58 करोड़ ली. पर आ गई। वहीं, पंजाब सरकार के फसल विविधीकरण मिशन के तहत 2025 में खरीफ मक्की की खेती का रकबा बढ़ा है। मक्की की बुवाई 2024 में 86,000 हेक्टेयर थी। 2025 में बढ़कर यह लगभग 1,00,000 हेक्टेयर तक हो गई। यह लगभग 16% की वृद्धि है।

हरियाणा में योजना से दूर होने के 2 बड़े कारण
किसानों को खेतों में नहरी पानी व बिजली अनुदान पर मिलती है। बिजली बिल प्रति यूनिट के बजाय प्रति हॉर्स पावर के हिसाब से आता है। यानी बिजली कितनी भी यूज हुई हो, बिल वही रहता है। ऐसे में धान के लिए पानी को लेकर अतिरिक्त खर्च नहीं लगता। सरकार धान एमएसपी पर खरीदती है। बाकी फसलें भावांतर भरपाई योजना के तहत खरीदी जाती हैं। इसका पैसा मिलने में देरी होती है। प्राइवेट खरीद अधिकतर एमएसपी से कम रेट पर होती है।

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