फर्जी कंपनी बनाकर HDFC बैंक को बनाया निशाना, करोड़ों रुपए की ठगी

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 07 Jan, 2026 10:21 PM

cheater targeted hdfc bank after creating false company

ठगों ने अब बैंक को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ठगों ने एक फर्जी कंपनी के जरिए HDFC बैंक के साथ करोड़ों रुपए की ठगी की वारदात को अंजाम दे दिया। मामले में पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच के बाद डीएलएफ फेज-1 थाने में कंपनी, तीन...

गुड़गांव, (ब्यूरो): ठगों ने अब बैंक को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ठगों ने एक फर्जी कंपनी के जरिए HDFC बैंक के साथ करोड़ों रुपए की ठगी की वारदात को अंजाम दे दिया। मामले में पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच के बाद डीएलएफ फेज-1 थाने में कंपनी, तीन निदेशकों और 27 अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

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पुलिस के मुताबिक, बैंक के लोकेशन मैनेजर ऋषभ राज ने शिकायत में बताया कि यह पूरा खेल एक नाम की कंपनी के इर्द-गिर्द बुना गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने गाजियाबाद और दिल्ली के एड्रेस पर एक कंपनी रजिस्टर्ड कराई, लेकिन उसका असली मकसद बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाना था। आरोपियों ने 27 ऐसे लोगों को तैयार किया, जिन्हें मनी म्यूल कहा जाता है। इन लोगों के नाम पर बैंक में बचत खाते खुलवाए गए। इन खाताधारकों ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताया और फर्जी सैलरी स्लिप के आधार पर बैंक से बड़े-बड़े लोन ले लिए गए। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश खाताधारक 20 से 30 साल के युवा थे, जिनके आधार और पैन कार्ड भी हाल ही में बनवाए गए थे, ताकि बैंक को उन पर शक न हो।

 

बैंक की आंतरिक जांच में पता चला कि इस गिरोह ने बैंक के कुल 86 उत्पादों का इस्तेमाल किया। इसमें 29 क्रेडिट कार्ड, 25 पर्सनल लोन, 13 कंज्यूमर लोन और 22 जंबो लोन शामिल थे। इन सभी के जरिए बैंक को करीब दो करोड़ रुपये से ज्यादा का वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप है। बैंक के जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। गिरोह ने एक मर्चेंट टर्मिनल (स्वाइप मशीन) लिया और क्रेडिट कार्ड के पैसों को कपड़ों की खरीदारी दिखाकर कंपनी के खाते में ट्रांसफर किया। फिर उसी पैसे को इन 27 खाताधारकों के खातों में फर्जी सैलरी के रूप में भेज दिया गया, ताकि बैंक को लगे कि कंपनी वास्तव में चल रही है।

 

बैंक को तब शक हुआ जब उनकी कलेक्शन टीम ने देखा कि 13 अलग-अलग ग्राहकों को एक ही कंपनी से पैसा मिल रहा है। जब डिजिटल जांच की गई, तो पता चला कि 27 में से 21 खाते केवल पांच मोबाइल डिवाइस से चलाए जा रहे थे। यानी खातों के मालिक अलग थे, लेकिन उन्हें कंट्रोल करने वाले कुछ ही लोग थे। इतना ही नहीं, डीएलएफ फेज-3 में जिन चार एड्रेस का इस्तेमाल किया गया था, वहां जांच करने पर कोई भी खाताधारक नहीं मिला। एचडीएफसी बैंक के लोकेशन मैनेजर ऋषभ राज की शिकायत पर पुलिस ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है। 

 

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