Edited By Manisha rana, Updated: 28 Feb, 2026 04:21 PM

सोनीपत जिले के बहालगढ़ स्थित गांव लिवासपुर के पास अवैध रूप से चल रही लाइटर तोड़ने की फैक्टरी में धमाका हुआ और पांच प्रवासी महिलाओं को चपेट में ले लिया।
सोनीपत (सन्नी मलिक) : सोनीपत जिले के बहालगढ़ स्थित गांव लिवासपुर के पास अवैध रूप से चल रही लाइटर तोड़ने की फैक्टरी में धमाका हुआ और पांच प्रवासी महिलाओं को चपेट में ले लिया। अब यह पांचों प्रवासी महिला बहालगढ़ के रामा अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है। ये हादसा नहीं बल्कि सिस्टम की लापरवाही का ज्वालामुखी है। एक छोटे से कमरे में गैस भरे लाइटर तोड़े जा रहे थे। ना सुरक्षा, ना फायर सिस्टम, ना कोई लाइसेंस धमाका हुआ, चीखें गूंजीं कमरे में धुआं भर गया और पांच महिलाएं आग के बीच फंस गईं। दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठा है।
धमाका इतना तेज था कि पूरा कमरा धुएं और आग से भर गया और बिहार के छपरा की शिवानी, रेनू, पिंकी, मंगोया और ममता अंदर ही फंस गईं, जिससे ये महिलाएं बुरी तरह झुलस गई। किसी तरह आसपास के लोगों ने गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।बताया जा रहा है कि यह अवैध फैक्ट्री सोनीपत के पंकज नामक व्यक्ति की है जो हादसे के बाद से फरार है। दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया।
इस मामले को लेकर मीडिया ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की तो अधिकारी एक-दूसरे पर बात टालते दिखाई दिए, कोई भी स्पष्ट बयान देने को तैयार नहीं। हादसे के लगभग 15 घंटे बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। जो अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है।आखिर प्रशासन की नाक तले यह अवैध फैक्ट्री कब से चल रही थी। क्या स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखा किया गया। इस पूरे मामले को सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है कि आखिर इन पांच जली हुई जिंदगियों का जिम्मेदार कौन है।
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