किसानों को बारिश से हुए नुक्सान का मुआवजा दे सरकार: हुड्डा

Edited By Isha, Updated: 24 Sep, 2022 10:04 AM

government should compensate farmers for the loss caused by rain hooda

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों के लिए मुआवजे की मांग की है। हुड्डा का कहना है कि पिछले 2 दिनों से हो रही बारिश के चलते प्रदेशभर में किसानों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। धान की तैयार फसल बर्बाद होने से हर...

रोहतक: पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों के लिए मुआवजे की मांग की है। हुड्डा का कहना है कि पिछले 2 दिनों से हो रही बारिश के चलते प्रदेशभर में किसानों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। धान की तैयार फसल बर्बाद होने से हर किसान को हजारों रुपए का नुक्सान हुआ है। जलभराव की वजह से धान समेत खेत में खड़ी तमाम फसलों पर असर पड़ा है। ऐसे में सरकार को फौरन गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
हुड्डा का कहना है कि इससे पहले भी लगातार कई सीजन से किसान मौसम की मार झेल रहे हैं। लेकिन अबतक किसानों को भारी बारिश, ओलावृष्टि और जलभराव की वजह से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं दिया गया। मुसीबत के वक्त किसानों की मदद के लिए न सरकार आगे आती है और न ही बीमा कंपनियां।
 

फसल बीमा योजना के नाम पर कंपनियां कर रही धोखा 
फसल बीमा योजना के नाम पर कंपनियां किस तरह किसानों के साथ धोखा कर रही हैं इसका एक उदाहरण हिसार में देखने को मिला। खरीफ सीजन में हुए फसली नुक्सान के चलते प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत रजिस्टर्ड किसानों ने जब मुआवजे के लिए अप्लाई किया तो कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया। अब कई महीने बाद उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया। अब किसान न इधर के रहे और न ही उधर के। इसी तरह किसानों से प्रीमियम लेकर सरकारी संरक्षण के चलते बीमा कंपनियां अब तक 40,000 करोड़ रुपए का मोटा मुनाफा कूट चुकी हैं। इस तरह आज किसानों पर मौसम, बीमा कंपनी और सरकारी नीतियों की तिहरी मार एकसाथ पड़ रही है।

2060 रुपए रेट वाली धान 1700 से 1800 रुपए प्रति क्विंटल में 
हुड्डा ने कहा कि बार-बार मांग करने के बावजूद सरकार ने अब तक मंडियों में धान की खरीद शुरू नहीं की। इसकी वजह से 2060 रुपए के रेट वाली धान 1700 से 1800 रुपए प्रति किं्वटल में पिट रही है। यही हाल बाजरा किसानों का है। सरकार द्वारा न तो बाजरा की एम.एस.पी. दी जा रही और न ही अपनी घोषणा के मुताबिक भावांतर भरपाई योजना से किसानों को हुए नुक्सान की भरपाई की जा रही है। इसी तरह मंडियों में आढ़तियों की हड़ताल का भी अबतक कोई समाधान नहीं निकाला गया। हुड्डा ने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी बारिश ने सरकार के दावों की पोल खोल कर रख दी है। आज किसान के खेत से लेकर आधुनिक माने जाने वाले शहर गुरुग्राम तक सब जलमग्न हैं। 
 

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