स्कूल की मांग को लेकर अनशन पर बैठी छात्राएं, भूख हड़ताल कर मांग रही हैं शिक्षा

Edited By Isha, Updated: 26 Jul, 2022 06:45 PM

girls sitting on dharna to demand school hunger strike to demand education

छात्राओं के परिजनों का कहना है कि वे अपनी बेटियों को बाहर भेजने के पक्ष में ही नहीं है। क्योंकि एक ओर पर्याप्त परिवहन सुविधा का अभाव है तो वहीं उन्हें अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती हैँ।

फतेहाबाद(रमेश): जिले के गांव सांचला के स्कूल को 10वीं से 12वीं तक अपग्रेड करने की मांग को लेकर छात्राएं पिछले 9 दिनों से धरने पर बैठी हैं। छात्राओं द्वारा यह मांग विधानसभा डिप्टी स्पीकर के सामने भी रखी जा चुकी है। छात्राओं का कहना है कि जब तक गांव के स्कूल को 12वीं तक अपग्रेड नहीं किया जाएगा तब तक यह अनशन इसी प्रकार जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के 3 गांव की 20 हज़ार आबादी होने के बावजूद भी 12वीं तक का कोई स्कूल नहीं है। गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ता है।

 

स्कूली बच्चों को टेबलेट बांटने वाली प्रदेश से स्कूल मांग रही छात्राएं

दरअसल मामला फतेहाबाद के सांचला गांव का है, जहां गांव की छात्राएं स्कूल की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गई हैं। स्कूल को अपग्रेड करने की मांग को लेकर गांव की बच्चियां पिछले 9 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रही है। छात्राओं की इस मांग को समर्थन देते हुए ग्रामीण भी लामबद्ध हो गए हैं। छात्राओं ने कहा कि एक तरफ तो सरकार बेटियों को पढ़ाने के लिए टेबलेट बांट रही है, मगर जहां बेटियां पढ़ना चाहती है वहां सुविधा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि 3 गांव की 20 हजार आबादी पर मात्र एक स्कूल है और वो भी केवल 10वीं तक है। ऐसे में 10वीं के बाद छात्राओं को पढ़ने के लिए दूर दराज के इलाकों में जाना पड़ता है। वहीं कुछ लड़कियों के परिजन उन्हें दूर पढ़ने नहीं जाने देते। जिस कारण उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

 

बेटियों को पढ़ने के लिए बाहर भेजने से डरते हैं परिजन

छात्राओं के परिजनों का कहना है कि वे अपनी बेटियों को बाहर भेजने के पक्ष में ही नहीं है। क्योंकि एक ओर पर्याप्त परिवहन सुविधा का अभाव है तो वहीं उन्हें अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती हैँ। उन्होंने कहना है कि पहले भी उनके गांव से पढऩे जाने वाली बच्चियों को साथ कई ऐसी घटनाएं हो चुकी है, जिसके बाद लोग अपनी बेटियों को बाहर भेजने से डरते हैं। ग्रामीणों और छात्राओं ने अपनी मांग को लेकर विधानसभा के डिप्टी स्पीकर और प्रशासन को एक मांग भी सौंपा था। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

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