Edited By Manisha rana, Updated: 07 Apr, 2026 04:08 PM

अंबाला के मुलाना से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ पढ़ने-लिखने की उम्र में मासूम बच्चों के कंधों पर भारी भरकम गैस सिलेंडरों का बोझ डाल दिया गया।
अंबाला (अमन कपूर) : अंबाला के मुलाना से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ पढ़ने-लिखने की उम्र में मासूम बच्चों के कंधों पर भारी भरकम गैस सिलेंडरों का बोझ डाल दिया गया। मामला सरकारी स्कूल का है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
ये तस्वीरें मुलाना स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की हैं। शिक्षा के मंदिर में जहाँ बच्चों के हाथों में कलम होनी चाहिए थी, वहां उनसे जोखिम भरा काम कराया जा रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे नन्हें बच्चे अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा भारी सिलेंडर खींच रहे हैं और स्कूल का स्टाफ मूकदर्शक बनकर खड़ा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने तुरंत संज्ञान लिया है।
अधिकारी का कहना है कि उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से स्पष्टीकरण माँगा है और जाँच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले को लेकर DEEO का कहना है कि उन्होंने यह वीडियो देखा और तुरंत वहां के बीईओ को प्रिंसिपल से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए। स्कूल प्रशासन ने अपनी गलती मानी है। भविष्य के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं कि बच्चों से उनकी शारीरिक क्षमता से बाहर का कोई काम न कराया जाए। अगर दोबारा ऐसी लापरवाही हुई, तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र भी जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय के मुखिया यह सुनिश्चित करें कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। मुलाना स्कूल के मुखिया को 2 दिन के भीतर लिखित जवाब देने का समय दिया गया है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी स्कूलों में चपरासी और अन्य स्टाफ की मौजूदगी के बावजूद बच्चों का इस तरह इस्तेमाल करना जायज है?
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