Edited By Manisha rana, Updated: 14 Aug, 2022 07:35 PM

हरियाणा सरकार की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी एक बार फिर से विवादों में घिर गई है। तीन साल बाद शनिवार को शुरू हुआ ट्रांसफर अभियान कुछ घंटे बाद बंद करने...
चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा सरकार की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी एक बार फिर से विवादों में घिर गई है। तीन साल बाद शनिवार को शुरू हुआ ट्रांसफर अभियान कुछ घंटे बाद बंद करने का ऐलान तो कर दिया गया लेकिन आधी रात को वेबसाइट खोल दी गई। जिसके चलते रविवार को सुबह-सवेरे सैकड़ों अध्यापकों ने आवेदन कर डाला। एक तरफ विभाग ट्रांसफर ड्राइव को रोकने के आदेश जारी कर रहा है तो दूसरी तरफ ट्रांसफर के लिए साइट को ओपन किया जा रहा है। जिसके चलते प्रदेश के हजारों अध्यापक असमंजस में हैं। अब नया शैडयूल कब जारी होगा, इसे लेकर भी विभाग ने स्पष्ट नहीं किया है।
दरअसल हरियाणा में शिक्षकों के तबादले तीन साल से अटके हुए हैं। शिक्षकों की बार-बार मांग पर विभाग ने इस बार ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव शुरू करने का निर्णय लिया था। इसे लेकर विभाग ने तमाम तैयारियों के साथ न केवल 25 जुलाई को शैडयूल भी जारी किया था बल्कि यह भी कहा था कि इस बार विभाग की तैयारी पूरी है और 15 अगस्त तक सभी शिक्षकों के ऑनलाइन तबादले कर दिए जाएंगे। इसके तहत विभाग ने सभी शिक्षकों से हां और ना के ऑप्शन भी भरवाए थे।
बीच रास्ते में ही विभाग ने शैडयूल का छोड़ दिया था साथ
विभाग द्वारा ट्रांसफर ड्राइव का शैडयूल जारी करने के बाद शिक्षकों को उम्मीद थी कि इस बार उनके तबादले होंगे। मगर विभाग ने शैडयूल का दूसरा चरण शुरू होते ही उसका साथ छोड़ दिया। जिसके मुताबिक चार अगस्त तक विभाग को रिक्त पदों और योग्य शिक्षकों की सूची जारी करनी थी। 11 अगस्त तक सूची जारी नहीं होने पर विभाग ने 12 अगस्त को तकनीकी खामियों का हवाला देकर कहा कि 13 से 16 अगस्त तक शिक्षकों को उनके मनपसंद के स्कूलों के विकल्प भर सकेंगे। अब 13 अगस्त की रात नया शैडयूल जारी करने का हवाला देकर शैडयूल को रोक दिया गया।
चार घंटे बाद बैकफुट पर आया शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग ने 13 अगस्त की सुबह से आवेदन शुरू किए थे लेकिन करीब 12 घंटे बाद ही शैडयूल को वापस ले लिया गया। महज चार घंटे बाद जब शिक्षकों ने आधी रात को देखा तो साइट चलनी शुरू हो गई और उन्होंने मनपसंद स्टेशन भरे तो साइट ने स्वीकार कर लिया।
शिक्षकों को गुमराह कर रहा है शिक्षा विभाग
हसला के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु का कहना है कि विभाग द्वारा पिछले तीन सालों से ट्रांसफर ड्राइव के अलग-अलग शैडयूल जारी करके शिक्षकों को गुमराह किया जा रहा है। जिससे शैक्षणिक माहौल पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। ऑनलाइन स्थानांतरण नीति में अधिकारियों ने मनमाफिक बदलाव करके इसके मुख्य सार को ही खत्म कर दिया है। जिसके चलते अब यह नीति सिरे नहीं चढ़ पा रही है और पॉलिसी के मुख्य उद्देश्य का कोई औचित्य नहीं रह गया है। विभाग को चाहिए था कि इस बार शैडयूल जारी करने से पहले सॉफ्टवेयर को पूरी तरह से जांच लेता और पूरी तैयारी करने के बाद शैडयूल जारी करता।