Edited By Manisha rana, Updated: 01 Jun, 2026 09:27 AM

हरियाणा में भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित 340 मेगावाट जलविद्युत खरीद योजना पर हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने ब्रेक लगा दिया है।
चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा में भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित 340 मेगावाट जलविद्युत खरीद योजना पर हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने ब्रेक लगा दिया है। आयोग ने साफ संकेत दिया है कि हरित ऊर्जा के नाम पर ऐसा कोई भी दीर्घकालिक समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिससे आने वाले वर्षों में बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका हो। आयोग के इस फैसले को केवल एक बिजली खरीद प्रस्ताव की अस्वीकृति नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और बिजली दरों को नियंत्रित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
40 साल के समझौते पर उठे सवाल
हरियाणा पावर परचेज सेंटर (एचपीपीसी) ने अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सात जलविद्युत परियोजनाओं से 340 मेगावाट बिजली खरीदने का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत 40 वर्षों तक बिजली खरीदने की योजना बनाई गई थी। सरकार का तर्क था कि भविष्य में बढ़ती मांग और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को देखते हुए अभी से बिजली के स्थायी स्रोत सुनिश्चित करना आवश्यक है। लेकिन आयोग ने माना कि इतनी लंबी अवधि के लिए किया जाने वाला समझौता वर्तमान परिस्थितियों में जोखिम भरा साबित हो सकता है।
उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता था असर
एचईआरसी ने अपने आदेश में कहा है कि जलविद्युत परियोजनाओं में निर्माण में देरी और लागत बढ़ने का इतिहास रहा है। विशेषकर पहाड़ी राज्यों में भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण परियोजनाओं की लागत कई बार अनुमान से कहीं अधिक बढ़ जाती है। यदि ऐसा हुआ तो बिजली खरीद की लागत बढ़ेगी और अंततः इसका असर उपभोक्ताओं के बिजली बिलों पर पड़ेगा। आयोग ने इसी संभावना को "टैरिफ शॉक" बताते हुए आगाह किया है।
बदलते ऊर्जा बाजार को भी बनाया आधार
आयोग ने माना कि ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और अन्य नवीकरणीय तकनीकों की लागत लगातार घट रही है। ऐसे में आज किए गए महंगे और दीर्घकालिक समझौते भविष्य में राज्य को सस्ते विकल्पों का लाभ लेने से रोक सकते हैं। आयोग का संदेश साफ है कि बिजली क्षेत्र में तकनीकी बदलावों को देखते हुए राज्यों को लचीली रणनीति अपनानी चाहिए, ताकि समय के साथ बेहतर और सस्ते विकल्पों का फायदा उठाया जा सके।
सरकार के लिए रास्ते अभी भी खुले
एचईआरसी ने प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करने के बजाय बिजली निगमों को बेहतर तैयारी के साथ दोबारा आने का अवसर भी दिया है। आयोग ने कहा है कि यदि विस्तृत लागत-लाभ विश्लेषण और उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव का स्पष्ट आकलन प्रस्तुत किया जाता है, तो भविष्य में प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जा सकता है। इसके अलावा खुले बाजार और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए बिजली खरीद के विकल्प तलाशने की भी सलाह दी गई है।
ऊर्जा नीति के लिए बड़ा संकेत
इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि हरियाणा में ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा के लक्ष्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के आर्थिक हित उनसे कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। आयोग ने सरकार को यह संदेश दिया है कि भविष्य की बिजली व्यवस्था केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने से नहीं, बल्कि सस्ती, टिकाऊ और उपभोक्ता हितैषी नीति से तय होगी। 340 मेगावाट जलविद्युत खरीद योजना पर लगी यह रोक आने वाले समय में हरियाणा की ऊर्जा नीति की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।