नदी के प्रदूषण पर केंद्र का 'सर्जिकल स्ट्राइक', हरियाणा को अल्टीमेटम... दी ये Warning

Edited By Isha, Updated: 27 Jan, 2026 10:57 AM

centre launches  surgical strike  against river pollution

यमुना की हालत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने अब ‘आर-पार’ की लड़ाई का मूड बना लिया है। जल शक्ति मंत्रालय ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मुनक और गंगा नहर का पानी

डेस्क: यमुना की हालत सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने अब ‘आर-पार’ की लड़ाई का मूड बना लिया है। जल शक्ति मंत्रालय ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मुनक और गंगा नहर का पानी डायवर्ट कर यमुना में छोड़ें। इसका मकसद नदी के ‘एनवायरनमेंटल फ्लो’ को बढ़ाना और उसे फिर से जिंदा करना है।  सिर्फ पानी ही नहीं, अब गंदे नालों और फैक्ट्रियों के कचरे पर भी लगाम लगेगी। इसके लिए एक थर्ड पार्टी कंपनी से ऑडिट कराया जाएगा।  यह कंपनी दिल्ली, यूपी और हरियाणा के उन सभी नालों की जांच करेगी जो यमुना में गिरते हैं. सरकार का यह ‘एक्शन प्लान’ यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। 

यमुना में जान फूंकने के लिए पानी का बहाव बढ़ाना सबसे जरूरी है. अधिकारियों ने बताया कि अपर गंगा कैनाल (यूपी) से करीब 800 क्यूसेक पानी सीधे वजीराबाद बैराज पर डायवर्ट किया जाएगा। इसके अलावा, हरियाणा की मुनक नहर से भी 100 क्यूसेक पानी सीधे नदी में छोड़ा जाएगा। हथिनीकुंड बैराज से पानी की एक ‘तीसरी धारा’ (Third Stream) बनाने का भी प्लान है। इससे नदी में जमा गाद (Silt) और कचरा कम होगा और पानी का बहाव नेचुरल तरीके से बना रहेगा।
 
अब सरकारी दावों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जाएगा. जल शक्ति मंत्रालय ने फैसला किया है कि तीनों राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, यूपी) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) से निकलने वाले पानी की रियल क्वालिटी चेक करने के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को हायर किया जाएगा. यह एजेंसी बताएगी कि एसटीपी से निकलने वाला पानी तय मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं. दिल्ली सरकार ने सीवरेज सिस्टम को सुधारने के लिए एक मास्टर प्लान भी लागू किया है. दिल्ली जल बोर्ड (DJB) अपने एसटीपी को अपग्रेड कर रहा है ताकि पानी का बीओडी (BOD) लेवल 10 तक लाया जा सके।
 
 
पड़ोसी राज्य हरियाणा से आने वाले गंदे नालों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. हरियाणा के नालों को तय मानकों (Norms) के हिसाब से रेगुलेट करने के लिए 2026 की डेडलाइन सेट की गई है. इसके अलावा, हरियाणा में इंडस्ट्रियल प्रदूषण को रोकने के लिए और ज्यादा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (CETP) लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का साफ मानना है कि बिना सख्त कदमों के यमुना को बचाना नामुमकिन है।
 

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