Edited By Krishan Rana, Updated: 04 Oct, 2026 03:21 PM

बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनील जागलान ने देश में बाल विवाह की भयावह सच्चाई के खिलाफ एक निर्णायक
जींद : बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता सुनील जागलान ने देश में बाल विवाह की भयावह सच्चाई के खिलाफ एक निर्णायक अभियान शुरू किया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के अनुसार भारत में हर साल करीब 15 लाख बालिकाओं का 18 वर्ष से पहले विवाह हो जाता है। यह आँकड़ा न सिर्फ बचपन छीनता है, बल्कि हजारों लड़कियों को तस्करी और शोषण के जाल में धकेल देता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-छह के आँकड़े बताते हैं कि देश में 20 से 24 वर्ष की महिलाओं में बाल विवाह की दर अभी भी 20.1 प्रतिशत है। पश्चिम बंगाल में यह 36.4 प्रतिशत, बिहार में 34.6 प्रतिशत और त्रिपुरा में 34 प्रतिशत है। ये तीन राज्य सबसे अधिक प्रभावित हैं। हरियाणा में यह दर 11.9 प्रतिशत है, फिर भी राज्य में पिछले वर्षों में सैकड़ों शिकायतें दर्ज हुई हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक अकेले 402 शिकायतें आईं। पिछले पाँच वर्षों में 1700 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं।
बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं है। यह कई मामलों में बाल तस्करी का रास्ता खोलता है। गरीब परिवारों में झूठे विवाह प्रस्ताव के नाम पर लड़कियों को बेचा जाता है। बाद में कई बालिकाएँ यौन शोषण और अनैतिक व्यापार के जाल में फँस जाती हैं। बचपन में जबरन विवाह की गई लड़कियाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मसम्मान से वंचित रह जाती हैं।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुनील जागलान ने सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के माध्यम से बच्ची है, दुल्हन नहीं अभियान शुरू किया है। यह अभियान बाल आजादी अभियान के साथ जुड़ा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के बाल विवाह मुक्त भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने देश की पहली बाल हितैषी ग्राम पंचायत बनाई थी।
आज वे देशभर की सैकड़ों ग्राम पंचायतों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। लाडो पंचायत के माध्यम से उन्होंने लड़कियों की विवाह आयु बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री जी को दस हजार से अधिक पत्र लिखवाए हैं। संबंधित विधेयक कैबिनेट से पारित हो चुका है, लोकसभा और राज्यसभा में प्रक्रिया शेष है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जी ने उनके कार्यों की कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की है। संयुक्त राष्ट्र की बाल, असमय और जबरन विवाह के उन्मूलन संबंधी बैठक में भी सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन और राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम हो रहा है।
सुनील जागलान ने बिल्कुल स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्ची दुल्हन नहीं होती। वह शिक्षा, खेल, सपनों और आजादी की हकदार है। अब समाज को जागना होगा। ग्राम पंचायतों, युवाओं, माता-पिता और हर नागरिक को साथ लेकर यह अभियान बाल विवाह मुक्त गाँव और अंततः बाल विवाह मुक्त भारत बनाएगा।
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