हथियार के बल पर फैलाई थी दहशत, 10 साल बाद आया फैसला, दोषियों को 3-3 साल की सजा

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 29 Jan, 2026 11:42 PM

3 year jail sentence for those spreading terror using weapons

घर में घुसकर हथियार के बल पर दहशत फैलाने वाले तीन आरोपियों को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रश्मीत कौर की अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।

गुड़गांव,(ब्यूरो):  घर में घुसकर हथियार के बल पर दहशत फैलाने वाले तीन आरोपियों को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रश्मीत कौर की अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने झज्जर निवासी सतपाल,सुखराली निवासी नवीन कुमार व बाला देवी को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला करीब 10 साल तक चला जिसके बाद अब अदालत ने यह फैसला सुनाया है।

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जानकारी के मुताबिक, मामला 14 जुलाई 2016 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता रेशमा राणा अपने बेटों के साथ घर पर थी। तभी सतपाल, नवीन और बाला देवी जबरन उनके बेडरूम में घुस आए। सतपाल के पास रिवॉल्वर थी, जिसे उसने बिस्तर पर रखकर बाला देवी द्वारा दिए गए किसी पुराने कर्ज की वसूली का दबाव बनाया। आरोपियों ने शेखी बघारते हुए कहा कि वे 20 से 22 कत्ल कर चुके हैं और पैसे न देने पर पूरे परिवार को खत्म कर देंगे। जब रेशमा के पति सुरेंद्र राणा घर लौटे, तो आरोपियों ने उन पर और बच्चों पर भी हथियार तान दिया।

 

इस केस में रेशमा के दो बेटों (अमन और युवराज) की बहादुरी और सूझबूझ निर्णायक साबित हुई। जब आरोपी अपनी सैंट्रो कार में फरार हो रहे थे, तब बच्चों ने उनकी फोटो खींच ली थी। पुलिस ने इन तस्वीरों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और धमकी भरी रिकॉर्डिंग वाले पेन ड्राइव को मुख्य साक्ष्य के रूप में पेश किया। अदालत ने गवाह और साक्ष्यों के आधार पर तीनों को दोषी देते हुए तीन-तीन साल की सजा और 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि, सतपाल के पास हथियार का वैध लाइसेंस होने के कारण उसे आर्म्स एक्ट की धाराओं से बरी कर दिया गया, लेकिन डराने-धमकाने और अवैध प्रवेश के लिए दोषी माना गया।

 

बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि यह पैसों के लेनदेन का विवाद है और उन्हें झूठा फंसाया गया है। उन्होंने घटना के तुरंत बाद शिकायत न देने और किसी सार्वजनिक गवाह के न होने पर भी सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इन दलीलों को खारिज कर दिया।

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