सीवर में 2 लोगों की मौत मामले में मानव अधिकार आयोग ने अपनाया सख्त रुख, कहा- गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा

Edited By Manisha rana, Updated: 12 Jan, 2026 12:07 PM

2 people died in sewer the human rights commission strict

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सीवर में सफाई के दौरान दो व्यक्तियों की दर्दनाक मृत्यु के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी अमानवीय घटनाएं न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि मानवाधिकारों पर गंभीर आघात भी हैं।

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सीवर में सफाई के दौरान दो व्यक्तियों की दर्दनाक मृत्यु के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी अमानवीय घटनाएं न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि मानवाधिकारों पर गंभीर आघात भी हैं। हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बने पूर्ण आयोग के आदेश से है कि दोषियों की जवाबदेही तय किए बिना किसी भी सूरत में मामले को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जाएगा।

आयोग के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता में पारित आदेश में यह उल्लेख किया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सफाई कर्मचारी आंदोलन बनाम भारत संघ मामले में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सीवर में बिना सुरक्षा उपकरणों के मैनुअल एंट्री कराए जाने की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे मामलों में मृतक के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजा देने को अनिवार्य ठहराया है।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक, हांसी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए पाया कि मामले की जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी है तथा अब तक जिम्मेदार व्यक्तियों की स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई है। रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करने के संबंध में कोई स्पष्ट विवरण नहीं है, जबकि जिला अटॉर्नी की राय में संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया बनता पाया गया है। यह लापरवाही मानव जीवन की हानि एवं गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में जांच एजेंसी के उदासीन रवैये को दर्शाती है।आयोग यह भी पाता है कि एफआईआर संख्या 326 दिनांक 19.10.2025 की जांच अपेक्षित ढंग से आगे नहीं बढ़ी है, विशेषकर जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान एवं जवाबदेही तय करने के संदर्भ में। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग ने जांच अधिकारी एवं उप पुलिस अधीक्षक (अपराध), हांसी को समस्त मूल रिकॉर्ड सहित व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग ने निम्नलिखित निर्देश दिए है :

उपायुक्त हिसार छह सप्ताह के भीतर मृतक श्रमिकों के परिवारों को दी गई या स्वीकृत राहत एवं मुआवजे, किसी भी अंतरिम सहायता तथा आश्रितों के पुनर्वास हेतु प्रस्तावित उपायों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
नगर परिषद, हांसी (या यदि क्षेत्र नगर सीमा से बाहर हो तो संबंधित ग्राम पंचायत, ग्राम रामपुरा, तहसील हांसी, जिला हिसार, सरपंच के माध्यम से) छह सप्ताह के भीतर घटना की परिस्थितियों, होटल परिसर के लाइसेंस व निरीक्षण तथा मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के उल्लंघन के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
पुलिस अधीक्षक, हांसी छह सप्ताह के भीतर दर्ज की गई एफआईआर, लागू धाराओं तथा मृत्यु के लिए जवाबदेही तय करने हेतु जांच की प्रगति की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
होटल प्रबंधन तत्काल बिना सुरक्षा उपकरणों, गैस परीक्षण, रेस्क्यू स्टैंडबाय, ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन मास्क एवं यंत्रीकरण के सेप्टिक/सीवर टैंक में किसी भी प्रकार की मैनुअल एंट्री को निलंबित करे तथा छह सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।”

आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों एवं गंभीर आरोपों को दृष्टिगत रखते हुए, संबंधित अधिकारियों को आदेश में उल्लिखित बिंदुओं पर की गई अपनी विस्तृत कार्यवाही रिपोर्ट अगली सुनवाई की तिथि 15 जनवरी 2026 से एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने दोहराया कि सीवर एवं सेप्टिक टैंकों की सफाई में किसी भी प्रकार की मैनुअल एंट्री कानूनन अपराध है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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