चौक चौराहों पर करोड़ों रुपए खर्च कर लगाई गई ट्रैफिक लाइटें के सिग्नल में उलझे 2 विभाग

Edited By Isha, Updated: 07 Jun, 2022 02:41 PM

2 departments entangled in the signals of traffic lights

सोनीपत नगर निगम एरिया में ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए सोनीपत के मेन चौक चौराहों पर करोड़ों रुपए खर्च कर ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी, लेकिन इन ट्रैफिक लाइटों के सिगनल में दो विभाग उलझते हुए नजर आ रहे हैं। एक तरफ नगर निगम अधिकारी

सोनीपत(सन्नी मलिक):  सोनीपत नगर निगम एरिया में ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए सोनीपत के मेन चौक चौराहों पर करोड़ों रुपए खर्च कर ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी, लेकिन इन ट्रैफिक लाइटों के सिगनल में दो विभाग उलझते हुए नजर आ रहे हैं। एक तरफ नगर निगम अधिकारी ने ग्रीन सिग्नल दे रहा है तो दूसरी तरफ पुलिस विभाग ने रेड सिग्नल दे रहा है।  नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सभी रेड लाइट चालू है ,लेकिन पुलिस विभाग के कर्मचारियों ने जानबूझकर बंद किया है। वहीं सभी चौक चौराहों पर लगी रेड लाइट बंद पड़ी हैं। और ट्रैफिक व्यवस्था को पुलिस कर्मचारी संभालते नजर आ रहे हैं ,हालांकि इस मामले में पुलिस का कोई भी अधिकारी कैमरे के सामने नहीं आ रहा है।

सोनीपत नगर निगम एरिया में सोनीपत में स्थित मेन चौक चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए थे सोनीपत के अग्रसेन चौक, गीता भवन चौक, देवी लाल चौक, महाराणा प्रताप चौक, कालूपुर चुंगी, लघु सचिवालय चौक पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए थे लेकिन कुछ समय बाद से ही यह सभी ट्रैफिक लाइटें बंद पड़ी है जिसके बाद इन सिग्नल से कहीं ना कहीं घोटाले की तरफ इशारा हो रहा है। क्योंकि रेड लाइट एरिया बंद पड़ी हैं कई चौकों पर रेड लाइट टूट भी चुकी हैं। वहीं नगर निगम के अधिकारी पुलिस के अधिकारियों पर आरोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ट्रैफिक लाइट लगाकर पुलिस महकमे के हवाले कर दी थी। अब उन्होंने ही इन ट्रैफिक लाइटों को बंद किया है। वही सोनीपत शहर वासियों का कहना है कि शुरुआत में सिर्फ एक दो बार ट्रेफिक लाइट चालू स्थिति में देखी थी। उसके बाद ही ट्रैफिक लाइटें कभी नहीं चली।अधिकारियों ने लाखों करोड़ों रुपए लगाकर बेकार किए हैं।

वही जब नगर निगम एरिया में लगाई गई ट्रैफिक लाइटों के बारे में नगर निगम कमिश्नर से सवाल किया गया तो कमिश्नर की जगह नगर निगम एससी ने जवाब दिया कि कहीं पर भी बंद लाइटे नहीं है और ना ही उनके पास कुछ कहते हैं और ना ही कहीं पर लाइटर टूटी हुई है उसके बाद कमिश्नर ने जवाब दिया कि उनकी तरफ से सभी रेड लाइट चालू स्थिति में पुलिस विभाग के हवाले कर दी गई थी।अब इन्हें पुलिस विभाग के कर्मचारी और अधिकारी जानबूझकर बंद रखते हैं। जब उनसे पूछा गया कि करोड़ों रुपए लगाए ही क्यों जाते हैं जब उनका प्रयोग नहीं होता तो उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से कोई भी रेड लाइट बंद नहीं है। जबकि स्थिति यह है कि कई चौकों पर हेडलाइट टूटी हुई है।उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में ही मामला नहीं है और पुलिस महकमे पर आरोप लगाकर पल्ला झाड़ गए।

नगर निगम के अधिकारियों का इस तरह जवाब देना की लाइटें ही बंद नहीं है और ना टूटी हुई हैं जबकि हकीकत यह है कि लाइट बंद और टूटी हुई हैं।बहराल पूरे मामले में देखना अब यही होगा कि पुलिस के अधिकारी कब तक कैमरे के सामने आते हैं और अपना क्या पक्ष रखते हैं, हालांकि नगर निगम के अधिकारी अपना रुख इस मामले में स्पष्ठ कर चुके है कि विभाग ने पुलिस विभाग को ट्रैफिक सिग्नल चालू हालात में सौंप रखे है।

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