आर्टेमिस हॉस्पिटल में दुर्लभ सर्जरी के बाद महिला को मिली चार साल से कानों में गूंजती आवाज से आजादी

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 08 Jan, 2026 08:07 PM

after a rare surgery at artemis hospital a woman was freed from ringing in her

सिगमॉइड साइनस रीसर्फेसिंग से लाइलाज माने जाने वाले पल्सटाइल टिनिटस से जूझ रहे हजारों लोगों के लिए दिखी उम्मीद की नई किरण_

गुड़गांव ब्यूरो : एक महिला को आखिरकार पिछले चार साल से हर धड़कन के साथ कानों में सुनाई देने वाली गूंज से आजादी मिल गई है। यह संभव हुआ है आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम में की गई अपनी तरह की अनूठी सर्जरी से। कानों में लगातार गूंजती आवाज के कारण महिला ने नौकरी छोड़ने का विचार बना लिया था। उनकी इस परेशानी को दूर करने के लिए सिगमॉइड साइनस रीसर्फेसिंग नाम की दुर्लभ सर्जरी की गई। यह एक दुर्लभ और बहुत जटिल सर्जरी है। इस सर्जरी की मदद से उन्हें अपनी पल्सटाइल टिनिटस की समस्या से तुरंत और पूरी राहत मिल गई है।

 

पिछले चार साल से महिला को लगातार अपने कान में एक आवाज गूंजती सी सुनाई देती थी। यह आवाज हर धड़कन के साथ आती थी। इससे उनके लिए अपनी ही धड़कन किसी बुरे सपने जैसी हो गई थी। उन्होंने इसके लिए देशभर के कई ईएनटी स्पेशलिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क किया। उन्होंने कई तरह के इलाज आजमाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सर्जरी करने वाली टीम की अगुआई करने वाली आर्टेमिस हॉस्पिटल की कंसल्टेंट ईएनटी सर्जन डॉ. तृषा श्रीवास्तव ने कहा, ‘कल्पना कीजिए कि अपने ही दिल की धड़कन बहुत तेजी से अगर 24 घंटे सुनाई दे, तो क्या स्थिति होगी। आप चैन से सो भी नहीं सकते हैं। न ही किसी चीज पर ध्यान लगता है और न ही सही से कोई काम हो पाता है।

 

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया, मरीज में सिगमॉइड साइनस को कवर करने वाली हड्डियों की दीवार में एक सेंटीमीटर का छेद था। सिगमॉइड साइनस हमारी खोपड़ी की महत्वपूर्ण ब्लड वेसल होती है। यह एक दुर्लभ समस्या थी, जिसे सिगमॉइड साइनस डेहिसेंस कहा जाता है। इससे तेजी से ब्लड फ्लो होता है, जो सीधे कान के अंदरूनी हिस्से में पल्सटाइल टिनिटस की तरह गूंजता है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, ‘असल कारण छिपा होता है, जिसे प्रशिक्षित नजरें ही देख सकती हैं। इस समस्या से जूझ रहे बहुत से मरीज उम्र भर लाइलाज ही रह जाते हैं।’

 

टीम ने इस समस्या के समाधान के लिए सिगमॉइड साइनस रीसर्फेसिंग सर्जरी की। यह सर्जरी बहुत दुर्लभ है। भारत में अब तक इस सर्जरी का एक ही ज्ञात रिकॉर्ड है। तीन घंटे की सर्जरी के दौरान उस जगह को पूरी तरह खोलकर डिफेक्टिव बोनी वॉल को मरीज के ही टिश्यू एवं बोन सीमेंट से फिर से बनाया गया और ब्लड फ्लो को सामान्य किया गया। यह प्रक्रिया बहुत खतरे वाली थी, क्योंकि सर्जरी बहुत सी प्रमुख नसों के आसपास की जानी थी। हालांकि सही प्लानिंग और सटीक सर्जरी से सफलता मिली। जब मरीज ने आंखें खोलीं, तो उनके पहले शब्द यही थे कि अब वह गूंज नहीं है। भारत में हजारों लोग पल्सटाइल टिनिटस से जूझ रहे हैं और इनमें से ज्यादातर को इसके साथ ही जीना सीख लेने को कहा जाता है। आमतौर पर ऐसे मामले में वस्कुलर ट्यूमर की जांच की जाती है। अगर कोई ट्यूमर नहीं मिलता है, तो प्रक्रिया वहीं रुक जाती है। इस सफल सर्जरी ने नया रास्ता खोला है।

 

भारत में सिगमॉइड साइनस रीसर्फेसिंग के पब्लिश्ड मामलों की कमी दिखाती है कि इस मामले में मेडिकल कम्युनिटी में भी जागरूकता कम है। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, ‘बहुत से ईएनटी सर्जन भी इस सर्जरी के बारे में नहीं जानते हैं, क्योंकि भारत में उपलब्ध मेडिकल लिटरेचर में इस बारे में बहुत कम लिखा है। इससे पहले ऐसा एक मामला सिर्फ एसजीपीजीआई लखनऊ में दर्ज है। इस मामले में मरीजों और डॉक्टरों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।’

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