Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 19 Feb, 2026 10:38 PM

सीएम फ्लाइंग ने गुरुग्राम में फर्जी डॉक्यूमेंट के जरिए इंश्योरेंस बिल क्लेम करने वाले एक अस्पताल का भंडाफोड़ किया है। सर्च ऑपरेशन के दौरान लगभग 25 इंश्योरेंस कंपनियों से जुड़ी लगभग 60 नकली इंश्योरेंस क्लेम फाइलें मिलीं हैं।
गुड़गांव, (ब्यूरो): सीएम फ्लाइंग ने गुरुग्राम में फर्जी डॉक्यूमेंट के जरिए इंश्योरेंस बिल क्लेम करने वाले एक अस्पताल का भंडाफोड़ किया है। सर्च ऑपरेशन के दौरान लगभग 25 इंश्योरेंस कंपनियों से जुड़ी लगभग 60 नकली इंश्योरेंस क्लेम फाइलें मिलीं हैं। जिनके जरिए एक करोड़ रुपए से ज्यादा का फ्रॉड सामने आया है। टीम ने अस्पताल में मौजूद तीन आरोपियों को अरेस्ट किया है।
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एसीपी वेस्ट अभिलक्ष जोशी ने बताया कि सीएम फ्लाईंग ने मई 2025 में निहाल कॉलोनी, न्यू पालम विहार स्थित गैलेक्सी वन अस्पताल में फर्जी तरीके से इंश्योरेंस बिल क्लेम करने की जांच को लेकर रेड की थी। रेड के दौरान पाया कि अस्पताल में एक डॉक्टर ने अपने नाम के आगे एमबीबीएस और एमडीएमए लिखा हुआ था, लेकिन उस डॉक्टर के पास एमडी की डिग्री नहीं थी। अस्पताल के आईपीडी रजिस्टर में विभिन्न व्यक्तियों की एंट्री करके झूठी इंश्योरेंस बिल क्लेम किया गया था। इस मामले में 14 फरवरी 2026 को थाना बजघेड़ा में सीएम फ्लाईंग द्वारा एक शिकायत गैलेक्सी वन अस्पताल में फर्जी तरीके से इंश्योरेंस बिल क्लेम करने के संबंध में दी गई।
जिसके बाद डीसीपी वेस्ट करण गोयल, एसीपी वेस्ट अभिलक्ष जोशी की अगुवाई में सिविल अस्पताल के डॉक्टर, साइबर एक्सपर्ट, ड्रग कंट्रोल ऑफिसर की टीम ने गैलेक्सी वन अस्पताल में सर्च ऑपरेशन चलाया। वहीं दयानंद कॉलोनी स्थित लैब्सवेल में भी सर्च की गई। जहां से नकली लैब रिपोर्ट और दूसरे दस्तावेज भी मिले। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में मौजूद तीन आरोपियों को अरेस्ट किया गया। जिनकी पहचान सपना, वर्षा और गौरव के रूप में हुई है। तीनों आरोपी हॉस्पिटल के कर्मचारी हैं तथा फर्जी तरीके से इंश्योरेंस बिल क्लेम करने में सहयोगी रहे है। इस दौरान काफी मात्रा में फर्जी डॉक्यूमेंट बरामद किए गए।
सर्च ऑपरेशन के दौरान लगभग 25 इंश्योरेंस कंपनियों से जुड़ी लगभग 60 नकली इंश्योरेंस क्लेम फाइलें मिली। जिससे ज्ञात हुआ कि नकली बेनिफिशियरी के साथ मिलकर नकली आईपीडी एडमिशन (बिना असल में हॉस्पिटल में भर्ती हुए) नकली मेडिकल रिकॉर्ड, नकली लैब रिपोर्ट और नकली फार्मेसी/ट्रीटमेंट बिल तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल नकली इंश्योरेंस क्लेम पाने के लिए किया गया। जिससे प्राप्त हुए पैसे बेनिफिशियरी और हॉस्पिटल के अधिकारियों के बीच बांटे गए।