हर हर महादेव’ की गूंज संग टेक्नो-स्टाइल्ड आनंदम!

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 17 Feb, 2026 08:23 PM

techno styled anandam with the echo of  har har mahadev

दिल्ली ने इस वर्ष महाशिवरात्रि का एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उत्सव देखा, जब दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (DJJS) के कॉर्पोरेट वर्कशॉप विंग ‘Peace Program’ ने आध्यात्म, संस्कृति, विज्ञान और तकनीक का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

गुड़गांव ब्यूरो : दिल्ली ने इस वर्ष महाशिवरात्रि का एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उत्सव देखा, जब दिव्य ज्योति जागृति संस्थान (DJJS) के कॉर्पोरेट वर्कशॉप विंग ‘Peace Program’ ने आध्यात्म, संस्कृति, विज्ञान और तकनीक का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में यह पर्व प्रयोगात्मक अध्यात्म की एक जीवंत अनुभूति बन गया। करीब 3,000 लोगों की प्रभावशाली उपस्थिति के साथ भारत मंडपम का अत्याधुनिक एम्फीथिएटर कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, शिक्षाविदों, चिकित्सकों और युवाओं से स्पंदित हो उठा। Peace Program की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर साध्वी तपेश्वरी भारती ने कहा, “दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी ने हमें सदैव अध्यात्म को प्रयोगात्मक दृष्टि से समझने की प्रेरणा दी है। यह आयोजन उसी का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब था, जिसे हमारी गौरवशाली सनातन संस्कृति के आलोक में प्रस्तुत किया गया। हमारा प्रयास था भगवान शिव के ‘तृतीय नेत्र’ आधारित ध्यान के टेक्नो-वैज्ञानिक पक्ष को उजागर करना और उसकी आज की मानवता के लिए अनिवार्यता को रेखांकित करना।”

 

को-कोऑर्डिनेटर साध्वी डॉ. निधि भारती ने बताया, “कई महीनों के गहन शोध के बाद हमने ऐसे सत्र तैयार किए जो भगवान शिव से प्रेरित जीवन-स्पर्शी तथ्यों को समेटे हुए थे। फिटनेस से लेकर रिश्तों और व्यक्तिगत-व्यावसायिक संतुलन तक, हमने तनावग्रस्त और अस्थिर मनों के लिए युक्तिसंगत समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया।” AI के संग अद्भुत आरंभ कार्यक्रम की शुरुआत एक अनोखे AI-संचालित डिजिटल एक्सपीरियंस ज़ोन से हुई, जिसने उत्साह और आश्चर्य का वातावरण निर्मित किया। सबने डिजिटल नंदी के कानों में अपनी मनोकामनाएं कहीं और स्क्रीन पर उन्हें भगवान शिव तक अर्पित होते देख भाव-विभोर हो उठे। केदारनाथ, अमरनाथ और काशी की वर्चुअल तीर्थयात्रा के होलोग्राफिक अनुभव ने आगंतुकों को भक्ति की सूक्ष्म तरंगों से जोड़ दिया। टेक्नो-स्टाइल अभिषेकम 10 फीट ऊंचे डिजिटल शिवलिंग पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन प्रोजेक्ट किए गए। उस पर ‘अभिषेकम ऐप’ के माध्यम से दूध, जल और पुष्प अर्पित करते श्रद्धालुओं के चेहरों पर अद्भुत उत्साह झलकता दिखा। परंपरा और तकनीक का यह संगम हर किसी के लिए “Wow मोमेंट” बन गया।

 

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    फन-स्टाइल नामाक्षरी भगवान शिव के दिव्य नामों पर आधारित अंताक्षरी की संगीतमय प्रस्तुति में दर्शकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। खेल, संगीत और आनंद का यह अनूठा मिश्रण वातावरण को उल्लास से भर गया। संस्कार स्टाइल प्रेम बनाम वेलेंटाइन  14 फरवरी की शाम को साध्वी डॉ. निधि भारती का सत्र “प्रेम से परम तक” युवाओं के लिए विशेष आकर्षण रहा। इस सत्र ने भारतीय संस्कृति और मूल्यों के आलोक में प्रेम की नवीन परिभाषा प्रस्तुत की। कॉर्पोरेट-स्टाइल गेम्स और इंटरैक्टिव ऐक्टिविटीज़ के माध्यम से क्षणिक आकर्षण और शाश्वत प्रेम के बीच स्पष्ट अंतर दर्शाया गया। सत्र ने युवाओं को आत्ममंथन के साथ एक संतुलित दृष्टिकोण भी प्रदान किया। तांडव-स्टाइल मार्शल आर्ट्स साध्वी परमा भारती द्वारा प्रस्तुत ‘आदियोगी का महायोग’ सत्र में स्वास्थ्य, फिटनेस, एरोबिक्स, तांडव और मार्शल आर्ट्स का सशक्त संगम देखने को मिला। ताइक्वांडो, ताई-ची और शाओलिन कुंग-फू जैसी विधाओं का शिव तांडव से मेल दर्शाया गया। साथ ही उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरे प्रभाव को उजागर किया गया। दर्शकों की सहभागिता ने वातावरण को ऊर्जा और रोमांच से भर दिया।

     

    शिव स्टाइल में दिव्य फैशन शो DJJS की इन-हाउस टीम द्वारा डिज़ाइन्ड और प्रस्तुत फैशन शो ‘विश्वनाथ का विश्वरूप’ ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक आयाम में प्रस्तुत किया। इंडोनेशिया, तिब्बत, जापान आदि में भगवान शिव के विविध रूपों की झलक ने दर्शकों में भारतीय होने का गर्व जगा दिया। न्यूरोसाइंस स्टाइल में ध्यान प्रस्तुति साध्वी तपेश्वरी भारती का सत्र “भगवान शिव का तृतीय नेत्र: मौन शिवालयों की सनातन गूंज” आयोजन की रीढ़ साबित हुआ। इसमें महादेव के तृतीय नेत्र की न्यूरोसाइंस पर आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण को मानव मॉडलों और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से समझाया गया। इस सत्र ने तार्किक सोच रखने वाले दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया और तृतीय नेत्र जागरण की आवश्यकता को हृदय में अंकित कर दिया। डमरू रोल स्टाइल में संगीत उत्सव साध्वी मणिमाला भारती द्वारा प्रस्तुत संगीतमय संध्या कश्मीर से कन्याकुमारी तक के सुरों की यात्रा बन गई। शिवभक्तों की कथाओं पर आधारित गीतों ने श्रद्धालुओं को कभी मुस्कुराने, कभी भावुक होने और कभी नृत्य करने पर विवश कर दिया।

     

    जैम सेशन स्टाइल में ‘हर हर महादेव’  संगीत समारोह देखते ही देखते डांस फ्लोर में बदल गया। ‘हर हर महादेव’ के गगनभेदी उद्घोष के साथ पूरा सभागार भक्ति और उल्लास में डूब गया। थेरेप्यूटिक भस्म स्टाइल में होली आयोजन का समापन एक अनूठी ‘भस्म होली’ से हुआ। महाकालेश्वर धाम से लाई गई पवित्र जड़ी-बूटियों से निर्मित भस्म की सुगंध ने पूरे भारत मंडपम को शिव आनंदम से सराबोर कर दिया। औषधीय और आध्यात्मिक महत्व से युक्त इस भस्म को श्रद्धालुओं ने अपार उत्साह और कृतज्ञता के साथ ग्रहण किया। आध्यात्मिक गहराई, टेक्नोलॉजी और उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ ‘शिव आनंदम 3.0’ उत्तर भारत की सबसे विशिष्ट महाशिवरात्रि उत्सवों में से एक बनकर उभरा—जहां हर सहभागी प्रेरणा, भक्ति और महादेव से नव-संबंध की अनुभूति से भर कर गया।

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