Edited By Manisha rana, Updated: 14 May, 2026 03:11 PM

यमुनानगर के हथनीकुण्ड बैराज पर जल संकट गहराता जा रहा है। इस समय बैराज पर पानी की आमद ऐतिहासिक रूप से बेहद कम दर्ज की गई है।
यमुनानगर (परवेज खान) : यमुनानगर के हथनीकुण्ड बैराज पर जल संकट गहराता जा रहा है। इस समय बैराज पर पानी की आमद ऐतिहासिक रूप से बेहद कम दर्ज की गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, यहां सिर्फ 2800 क्यूसिक पानी रिकॉर्ड किया गया है, जो सामान्य स्तर से काफी नीचे है। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश और वेस्टर्न जमना कैनाल पर पड़ रहा है, जिन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा।
जल की कमी का असर केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। हाईडल पावर प्रोजेक्ट पर भी इसका प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है, जहां बिजली उत्पादन बाधित हो गया है। इससे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। अगर पिछले साल की स्थिति से तुलना करें, तो तस्वीर बिल्कुल अलग थी। मानसून सीजन के दौरान यहां लगभग 3 लाख 29 हजार क्यूसिक पानी दर्ज किया गया था, जो इस साल के मुकाबले कई गुना अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फ पिघलने से रात के समय जलस्तर में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी जरूर हो रही है, लेकिन यह बढ़ोतरी मौजूदा संकट को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कुल मिलाकर, हथनीकुण्ड बैराज पर घटता जलस्तर आने वाले दिनों में कृषि, पेयजल और बिजली तीनों क्षेत्रों के लिए चुनौती बन सकता है। अब सबकी नजरें मानसून पर टिकी हैं।
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