मंदिर शृाइन बोर्ड के अधीन आते गहराया संकट, 22 कर्मचारियों को 6 महीने से नहीं मिला वेतन, CM से लगाई गुहार

Edited By Krishan Rana, Updated: 25 Jun, 2026 02:32 PM

the crisis deepened after the temple came under the shrine board 22 employees h

हरियाणा के बेरी (झज्जर) स्थित प्रसिद्ध मां भीमेश्वरी मंदिर को शृाइन बोर्ड के अधीन लाने के बाद अब वहां

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा के बेरी (झज्जर) स्थित प्रसिद्ध मां भीमेश्वरी मंदिर को शृाइन बोर्ड के अधीन लाने के बाद अब वहां कार्यरत कर्मचारियों के सामने वेतन संकट खड़ा हो गया है। मंदिर के 22 कर्मचारियों को पिछले करीब छह माह से वेतन नहीं मिला है।

आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर लंबित वेतन जारी कराने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को जल्द समाधान का आश्वासन दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि मंदिर प्रशासन व्यवस्था बदलने के बाद से उनकी नियमित आय प्रभावित हुई है और अब परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।

सीएम से मिलकर सौंपा ज्ञापन
मंदिर कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर बताया कि मंदिर पहले ट्रस्ट के अधीन संचालित होता था, लेकिन 3 दिसंबर से इसे शृाइन बोर्ड के अधीन कर दिया गया। इसके बाद से प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव तो हुआ, लेकिन कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मामला लंबित रह गया। प्रतिनिधिमंडल में विकास पुरी, राजेश शर्मा, प्रदीप वत्स, रजत कुमार, मनोज कुमार, मुन्नीलाल, सुल्तान सिंह और कमल कुमार शामिल रहे। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि कई महीनों से वेतन नहीं मिलने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना चुनौती बन गया है।

सीईओ से भी कर चुके कई बार मुलाकात
कर्मचारियों के अनुसार वे इस मामले को लेकर बेरी की एसडीएम एवं शृाइन बोर्ड की सीईओ रेणुका नांदल और झज्जर उपायुक्त से भी मिल चुके हैं। अधिकारियों की ओर से उन्हें बताया गया कि वेतन भुगतान से संबंधित मंजूरी के लिए मामला अंतिम स्तर पर चंडीगढ़ भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक राशि जारी नहीं हो सकी। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद भुगतान न होने से कर्मचारियों में चिंता बढ़ रही है।

दानपात्र सरकार के, लेकिन वेतन का इंतजार
मंदिर कर्मचारियों का कहना है कि शृाइन बोर्ड व्यवस्था लागू होने के बाद जनवरी माह से मंदिर परिसर में सरकार की ओर से दानपात्र भी स्थापित किए जा चुके हैं और संचालन की प्रक्रिया नए ढांचे के अनुसार चल रही है। इसके बावजूद कर्मचारियों का भुगतान लंबित रहने से असंतोष बढ़ रहा है। मंदिर में पुजारी, सहायक पुजारी, सेवादार, सफाई कर्मचारी और चौकीदार सहित कुल 22 लोग कार्यरत हैं।

क्या है शृाइन बोर्ड मॉडल और क्यों अहम है बेरी मंदिर
राज्य में प्रमुख धार्मिक स्थलों के प्रबंधन, आय-व्यय में पारदर्शिता और व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने के उद्देश्य से शृाइन बोर्ड मॉडल लागू किया जा रहा है। इसके तहत मंदिरों के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और सुविधाओं की निगरानी प्रशासनिक ढांचे के तहत की जाती है।

बेरी का धार्मिक स्थल प्रदेश के प्रमुख आस्था केंद्रों में माना जाता है और यहां हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर की व्यवस्था शृाइन बोर्ड के अधीन आने को प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखा गया था, लेकिन अब कर्मचारियों का वेतन मुद्दा इस बदलाव की पहली बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।   

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