आत्मनिर्भर ऊर्जा तंंत्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है देश : केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल

Edited By Krishan Rana, Updated: 06 Apr, 2026 08:32 PM

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केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को नई दिल्ली में मिशन फॉर एडवांस एंड हाई इम्पैक्ट रिसर्च

नई दिल्ली (संजय अरोड़ा): केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को नई दिल्ली में मिशन फॉर एडवांस एंड हाई इम्पैक्ट रिसर्च पर उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस आशय के बारे में उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि ‘आज मिशन फॉर एडवांस एंड हाई इम्पैक्ट रिसर्च पर उच्चतरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए ऊर्जा क्षेद्ध में अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु अकादमिक संस्थानों तथा निजी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक एवं सार्थक विचार-विमर्श किया गया।

मिशन फॉर एडवांस एंड हाई इम्पैक्ट रिसर्च विद्युत मंत्रालय एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के लिए एक सतत एवं आत्मनिर्भर ऊर्जा तंंत्र विकसित करना है। बैठक के दौरान एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, ग्रिड स्टोरेज सोल्यूशन, एमिशन कंट्रोल डिवाइस तथा अल्ट्रनेट बैटरी स्टोरेज टैक्नालॉजी जैसी उन्नत एवं भविष्य उन्मुख तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को गति मिलेगी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।’ 

यह है मिशन फॉर एडवांस एंड हाई इम्पैक्ट रिसर्च का उद्देश्य

विद्युत मंत्रालय और नवीन  एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे मिशन फॉर एडवांस एंड हाई-इम्पैक्ट रिसर्च शीर्षक वाले राष्ट्रीय मिशन का उद्देश्य बिजली क्षेत्र में नवीनतम और उभरती प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी अनुसंधान, विकास और प्रदर्शन को सुविधाजनक बनाना है। यह मिशन उभरती प्रौद्योगिकियों की पहचान करके और उन्हें कार्यान्वयन के चरण में ले जाकर भविष्य के आर्थिक विकास के लिए मुख्य ईंधन के रूप में अपना योगदान देता है और विद्युत क्षेत्र में भारत को दुनिया का एक विनिर्माण केंद्र बनाना इसका उद्देश्य है।

मिशन को दो मंत्रालयों के तहत ऊर्जा मंत्रालय, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के वित्तीय संसाधनों को पूल करके वित्त पोषित किया जा रहा है।  किसी भी अतिरिक्त धन की आवश्यकता भारत सरकार के बजटीय संसाधनों से जुटाई जाती है। 2023-24 से 2027-28 तक पांच साल की प्रारंभिक अवधि के लिए बनाई गई इस योजना का मकसद विद्युत क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। यह मिशन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी योगदान देता है। पिछले करीब 12 वर्षों में भारतीय विद्युत क्षेत्र एक जीवंत और वित्तीय रूप से व्यवहार्य क्षेत्र में बदल गया है। इसके लिए न केवल बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है, बल्कि अनुसंधान और नवाचार द्वारा संचालित परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की भी आवश्यकता है। 

सौर ऊर्जा में लंबे कदम भर रहा है भारत
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का मानना है कि जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, घरों, उद्योगों, कृषि और सेवा क्षेत्रों में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इस मांग को बड़े पैमाने पर पूरा करने के लिए न केवल अधिक बिजली उत्पादन की आवश्यकता है, बल्कि एक ऐसे तंत्र की भी जरूरत है जो इसे विशाल भौगोलिक क्षेत्रों तक पहुंचा सके।

इस व्यापक विस्तार पर ध्यान केंद्रित करते हुए, पारंपरिक और नवीकरणीय दोनों स्रोतों से उत्पादन क्षमता में निरंतर वृद्धि की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान (31 जनवरी 2026 तक), सभी स्रोतों से रिकॉर्ड 52,537 मैगावाट  की उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। इसमें से 39,657 मैगावाट नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त हुई है, जिसमें 34,955 मैगावाट सौर ऊर्जा और 4,613 मैगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। यह एक ही वर्ष में अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि है, जिसने वित्तीय वर्ष 2024-25 में हासिल किए गए 34,054 मैगावाट के पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है।

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