Edited By Isha, Updated: 11 Aug, 2026 02:25 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेना के जवानों और उनके परिवारों के पेंशन अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आकस्मिक छुट्टी पर रहते हुए किसी सैन्यकर्मी की कार्डियक अरेस्ट से
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेना के जवानों और उनके परिवारों के पेंशन अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आकस्मिक छुट्टी पर रहते हुए किसी सैन्यकर्मी की कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु को केवल इस आधार पर सैन्य सेवा से अलग नहीं किया जा सकता कि वह सक्रिय ड्यूटी पर नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि यह देखना आवश्यक है कि मृत्यु के समय सैन्यकर्मी सेवा में था या नहीं। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सैनिक की विधवा को सामान्य पारिवारिक पेंशन के बजाय विशेष पारिवारिक पेंशन देने के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण, क्षेत्रीय पीठ, चंडीगढ़ के आदेश को बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी।
यह फैसला जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने सुनाया। केंद्र सरकार ने न्यायाधिकरण के 15 दिसंबर 2022 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सैनिक की विधवा को विशेष पारिवारिक पेंशन देने का निर्देश दिया गया था।
संबंधित सेना कर्मी की 17 जनवरी 2017 को कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु हुई थी। वह 16 जनवरी से 30 जनवरी 2017 तक स्वीकृत आकस्मिक छुट्टी पर था और 17 जनवरी को उसकी छुट्टी का पहला दिन था। मृत्यु के समय वह 17 वर्ष से अधिक की सैन्य सेवा पूरी कर चुका था।
दायर पति की मृत्यु के बाद विधवा ने विशेष पारिवारिक पेंशन के लिए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में याचिका की थी। न्यायाधिकरण ने 15 दिसंबर 2022 को उसकी याचिका स्वीकार करते हुए 18 जनवरी 2017 से विशेष पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ केंद्र सरकार हाई कोर्ट पहुंची और दलील दी कि सैनिक की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई और वह सक्रिय ड्यूटी पर नहीं था, इसलिए इसे सैन्य सेवा से नहीं जोड़ा जा सकता।