हरियाणा की निवेश क्रांति के रणनीतिकार राजेश खुल्लर, ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ से ग्लोबल समिट के लिए बड़ी जिम्मेदारी

Edited By Krishan Rana, Updated: 25 Aug, 2026 09:01 PM

rajesh khullar the strategist behind haryana s investment revolution shoulders

हरियाणा को देश के अग्रणी औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा को देश के अग्रणी औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार ने अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाया है। अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ से पहले देश-विदेश के निवेशकों को हरियाणा से जोड़ने के लिए लगातार आउटरीच अभियान चलाए जा रहे हैं। इस पूरी रणनीति में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक मानी जा रही है।

प्रशासनिक अनुभव, नीतिगत समझ और दूरदृष्टि के कारण राजेश खुल्लर को हरियाणा की प्रशासनिक व्यवस्था में रणनीतिक सोच रखने वाले अधिकारियों में प्रमुख माना जाता है। उनकी कार्यशैली का जोर केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करने पर नहीं, बल्कि निवेश को धरातल पर उतारने, विभागीय समन्वय मजबूत करने और उद्योगों के लिए अनुकूल प्रशासनिक वातावरण तैयार करने पर रहता है। यही कारण है कि राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उन्हें हरियाणा का ‘चाणक्य’ भी कहा जाता है।
हालिया मुंबई अभियान में सामने आए निवेश आंकड़े इस रणनीति की सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं। ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के अंतरराष्ट्रीय आउटरीच कैंपेन के दूसरे दिन विभिन्न कंपनियों ने हरियाणा में 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में अधिकारियों तथा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इन समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया।

खुल्लर की रणनीतिक सोच से ‘हैपनिंग हरियाणा’ को मिल रही नई धार

बड़े निवेश सम्मेलन की तैयारी केवल मंच, प्रचार और निवेशकों को आमंत्रित करने तक सीमित नहीं होती। इसके पीछे लंबे समय तक चलने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया, नीतियों की तैयारी, विभागों के बीच समन्वय और निवेश प्रस्तावों को तेजी से आगे बढ़ाने की व्यवस्था काम करती है।
यहीं राजेश खुल्लर की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के रूप में वे सरकार के विकास संबंधी विजन को प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनकी नीतियों को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल व विभाग भी महत्वपूर्ण भूमिका व कड़ी मेहनत भी इसमें शामिल है।
         

हरियाणा की निवेश नीति में अब केवल बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के बजाय निवेशकों के लिए तेज निर्णय, नीतिगत स्थिरता और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। यह बदलाव सरकार की उस सोच को दर्शाता है जिसमें निवेश को केवल एमओयू तक नहीं बल्कि उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
मुंबई में 66 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव

भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ अंतरराष्ट्रीय आउटरीच कैंपेन का दूसरा दिन राज्य के लिए निवेश की दृष्टि से खासा महत्वपूर्ण रहा।
इस दौरान विभिन्न कंपनियों ने हरियाणा में 66,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में अधिकारियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने एमओयू का आदान-प्रदान किया।
इतनी बड़ी निवेश राशि का सामने आना इस बात का संकेत है कि राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा की औद्योगिक संभावनाओं और निवेश नीतियों को लेकर उद्योग जगत में रुचि बनी हुई है।
इन निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना अब सरकार के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। यही वह क्षेत्र है जहां राजेश खुल्लर के प्रशासनिक अनुभव और समन्वय क्षमता की वास्तविक परीक्षा होगी।

‘फाइल मूवमेंट’ नहीं, ‘प्रोजेक्ट मूवमेंट’ पर सरकार का जोर
मुंबई में उद्योग जगत को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार की कार्यशैली को स्पष्ट करते हुए कहा कि हरियाणा निवेशकों को केवल भूमि, प्रोत्साहन और मंजूरी नहीं देता, बल्कि स्केल, स्पीड, नीति-निश्चितता और साझा समृद्धि पर आधारित रणनीतिक साझेदारी प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि हरियाणा सरकार फाइल मूवमेंट पर नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट मूवमेंट पर विश्वास करती है।
मुख्यमंत्री की यह सोच प्रशासनिक व्यवस्था में तेजी और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति की ओर संकेत करती है। इस दृष्टिकोण को जमीन पर लागू करने में राजेश खुल्लर की भूमिका स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि एमओयू के बाद परियोजना को मंजूरी, भूमि, आधारभूत सुविधाएं और अन्य आवश्यक स्वीकृतियां कितनी तेजी से मिलती हैं। सरकार की ‘प्रोजेक्ट मूवमेंट’ वाली सोच इसी समस्या का समाधान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पहले 1.10 लाख करोड़, अब 66 हजार करोड़ से अधिक के नए एमओयू
हरियाणा सरकार की मौजूदा निवेश रणनीति का असर इससे पहले भी देखने को मिला है। गुरुग्राम में इंडस्ट्री पॉलिसी लॉन्च के दौरान करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए थे। मुख्यमंत्री के अनुसार 123 कंपनियों में से 108 कंपनियों को भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सरकार की एमओयू को जमीन पर उतारने की क्षमता का संकेत मिलता है।
अब मुंबई में 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश समझौतों ने आगामी अप्रैल 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के लिए वातावरण और मजबूत किया है। यदि इन निवेश प्रस्तावों को भी तेजी से परियोजनाओं में बदला जाता है तो हरियाणा की निवेश नीति को देश के अन्य राज्यों के मुकाबले मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
खुल्लर की भूमिका: नीति से परियोजना तक का सफर

किसी भी निवेश अभियान की असली सफलता उस समय सामने आती है जब निवेशक केवल समझौता करने के बजाय परियोजना शुरू करता है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कई विभागों का एक साथ काम करना जरूरी होता है।
भूमि, बिजली, पानी, पर्यावरण, उद्योग, श्रम, परिवहन और स्थानीय प्रशासन से जुड़े विषयों पर तेजी से निर्णय लेने पड़ते हैं। राजेश खुल्लर जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका ऐसे में एक समन्वयकारी और रणनीतिक केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण हो जाती है।
उनकी दूरदृष्टि का लाभ यह हो सकता है कि निवेश को केवल गुरुग्राम या एनसीआर तक सीमित रखने के बजाय हरियाणा के दूसरे जिलों तक पहुंचाया जाए। इससे औद्योगिक विकास के साथ क्षेत्रीय संतुलन और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

उद्योग और श्रमिकों के बीच बेहतर संबंध की पहल
मुख्यमंत्री ने मुंबई में उद्योग जगत को संबोधित करते हुए औद्योगिक विवादों से जुड़े एक महत्वपूर्ण कदम की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उद्योग और श्रमिकों के बीच अधिकारों तथा अन्य औद्योगिक विवादों को सुलझाने के लिए हरियाणा सरकार ने उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद का गठन किया है।
यह पहल निवेशकों के लिए औद्योगिक माहौल को अधिक स्थिर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। उद्योग के लिए शांतिपूर्ण और सहयोगी श्रम वातावरण उत्पादन की निरंतरता और निवेश के भरोसे दोनों के लिए जरूरी होता है।
इस प्रकार सरकार निवेश को केवल भूमि और पूंजी के नजरिये से नहीं बल्कि पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में देख रही है।

मुंबई में वैश्विक निवेशकों तक पहुंचा हरियाणा का संदेश
मुख्यमंत्री ने मुंबई दौरे के दौरान विभिन्न देशों के कन्सुलेट जनरल्स, उद्योग जगत की हस्तियों, निवेशकों तथा मुंबई के वित्तीय एवं कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। यह आउटरीच अभियान हरियाणा को राष्ट्रीय निवेश मानचित्र से आगे वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है सरकार का संदेश स्पष्ट है कि हरियाणा निवेशकों को केवल सुविधाएं देने वाला राज्य नहीं, बल्कि दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी का भरोसा देने वाला प्रदेश बनना चाहता है।

अप्रैल 2027 में खुल्लर के विजन पर  ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’

अप्रैल 2027 का ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ हरियाणा सरकार के लिए बड़ा अवसर है। मुंबई में 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के नए एमओयू और इससे पहले 1.10 लाख करोड़ रुपये के समझौते सरकार की तैयारियों को मजबूत आधार दे रहे हैं। लेकिन इन निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं, उत्पादन और रोजगार में बदलना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
यहीं राजेश खुल्लर की रणनीतिक क्षमता सबसे अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का राजनीतिक नेतृत्व, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल की  सक्रियता और प्रशासनिक स्तर पर खुल्लर की समन्वयकारी चाणक्य की भूमिका मिलकर हरियाणा के निवेश अभियान को नई गति दे सकती है।
‘हरियाणा के चाणक्य’ के सामने बड़ा लक्ष्य
राजेश खुल्लर की पहचान एक अनुभवी, दूरदर्शी और रणनीतिक सोच वाले प्रशासनिक अधिकारी के रूप में बनी है। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के रूप में उनका सबसे बड़ा योगदान यह हो सकता है कि सरकार के बड़े औद्योगिक लक्ष्यों को प्रशासनिक स्तर पर ऐसी गति मिले, जिसका सीधा असर जमीन पर दिखाई दे।
मुंबई में हुए 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू ने ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ की सफलता का मजबूत संकेत दिया है। अब अप्रैल 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट को उससे भी बड़े और प्रभावशाली मंच के रूप में तैयार करने की चुनौती है।
हरियाणा को निवेश, नवाचार, उद्योग और रोजगार का वैश्विक केंद्र बनाने की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की महत्वाकांक्षा को जमीन पर उतारने में राजेश खुल्लर की भूमिका आने वाले महीनों में और महत्वपूर्ण होती जाएगी।
एमओयू से परियोजना, परियोजना से उत्पादन और उत्पादन से रोजगार—इसी पूरी कड़ी को गति देना अब हरियाणा के ‘चाणक्य’ राजेश खुल्लर के प्रशासनिक विजन की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

 

 

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