Edited By Isha, Updated: 09 May, 2026 04:44 PM

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की 'लाइफलाइन' कही जाने वाली नोहर फीडर में पानी की किल्लत एक बार फिर किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पड़ोसी राज्य हरियाणा की नहरों में पर्याप्त
डेस्क: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की 'लाइफलाइन' कही जाने वाली नोहर फीडर में पानी की किल्लत एक बार फिर किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पड़ोसी राज्य हरियाणा की नहरों में पर्याप्त पानी होने के बावजूद नोहर फीडर के अंतिम छोर (टेल) तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है। इस स्थिति ने नोहर तहसील के लगभग 35 गांवों के किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है।
क्या है मुख्य विवाद?
नोहर फीडर का लगभग 27 किलोमीटर का हिस्सा हरियाणा की सीमा के भीतर आता है। किसानों का आरोप है कि हरियाणा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पानी की चोरी हो रही है और जर्जर नहर के कारण सीपेज (रिसाव) की समस्या बनी हुई है। राजस्थान को मिलने वाला निर्धारित 332 क्यूसेक पानी टेल तक पहुँचते-पहुँचते आधा भी नहीं बचता।
गर्मी के इस मौसम में नहर के सूखने से न केवल खरीफ की फसलों (विशेषकर कपास और ग्वार) की बुवाई प्रभावित हो रही है, बल्कि दर्जनों गांवों में पीने के पानी का भंडारण भी खत्म होने के कगार पर है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे हरियाणा के अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं, लेकिन धरातल पर अब तक कोई सुधार नहीं दिखा है। नोहर फीडर के पुनर्निर्माण (Relining) के लिए बजट स्वीकृत हुए लंबा समय बीत चुका है। किसानों की मांग है कि हरियाणा क्षेत्र में पड़ने वाली नहर की दीवारों को पक्का किया जाए ताकि चोरी और रिसाव रुके। हालांकि, अंतरराज्यीय अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और प्रशासनिक लालफीताशाही के कारण यह काम कछुआ चाल से चल रहा है।
किसानों की महापंचायत और चेतावनी
'नोहर फीडर बचाओ संघर्ष समिति' ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है। किसानों का कहना है कि यदि अगले 72 घंटों के भीतर रेगुलेशन के अनुसार पूरा पानी नहीं छोड़ा गया, तो वे सड़कों पर उतरेंगे और जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।