Narnaul : शहीद सूबेदार हीरालाल का सैन्य सम्मान से हुआ अंतिम संस्कार, कश्मीर में गश्त के दौरान हुए थे शहीद

Edited By Yakeen Kumar, Updated: 10 Jan, 2026 07:40 PM

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महेंद्रगढ़ जिले के निवासी तथा आतंकवाद विरोधी विशेष इकाई राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात सूबेदार हीरालाल का उत्तरी कश्मीर के जिला बारामुला में ड्यूटी के दौरान

नारनौल (भालेंदर यादव) : महेंद्रगढ़ जिले के निवासी तथा आतंकवाद विरोधी विशेष इकाई राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात सूबेदार हीरालाल का उत्तरी कश्मीर के जिला बारामुला में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। पहाड़ी क्षेत्र में गश्त के दौरान दुर्गम और फिसलन भरे रास्ते पर संतुलन बिगड़ने से वह गहरी खाई में गिर गए थे, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। शहीद के बेटे गजेंद्र ने उनके पैतृक गांव में मुखाग्नि दी। 

भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट में तैनात नारनौल के गांव अकबरपुर निवासी सूबेदार हीरालाल 9 जनवरी को देश सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव अकबरपुर लाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान और भावभीनी विदाई के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। 

2023 में सूबेदार के पद पर हुए थे पदोन्नत 
महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर निवासी हीरालाल का जन्म 27 अप्रैल 1981 को हुआ था। उन्होंने 30 जनवरी 2000 को भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया। करीब 23 वर्षों की सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर सहित कई संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों में कर्तव्य निभाया। 23 मई 2023 को उन्हें सूबेदार के पद पर पदोन्नत किया गया था। 

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 पार्थिव शरीर पहुंचते ही शोक में डूबा गांव
शहीद सूबेदार हीरालाल के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही अकबरपुर शोक में डूब गया। ग्रामीणों, पूर्व सैनिकों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में तिरंगा यात्रा निकाली गई। गांव की गलियों से जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गुजरा, तो हर आंख नम हो गई और हर घर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सेना की टुकड़ी ने शहीद को अंतिम सलामी दी।

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शहीद सूबेदार हीरालाल के 88 वर्षीय पिता हरिराम गांव में रहते हैं और हार्ट के मरीज हैं। बेटे की शहादत की खबर से परिवार गहरे सदमे में है। उनकी पत्नी रोशनी देवी गृहिणी हैं। बेटा गजेंद्र आईआईटी पुणे में पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी स्नेहलता दिल्ली में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। हीरालाल परिवार के लिए मजबूती और सहारे का प्रतीक थे।अकबरपुर गांव के लिए यह क्षण गर्व और गम दोनों का रहा। गांव ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी, जिसने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। सूबेदार हीरालाल की शहादत को गांव और क्षेत्र हमेशा गर्व के साथ याद करेगा।

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