नशा तस्करों के खिलाफ आधी क्षमता से लड़ रहा नारकोटिक्स ब्यूरो, 46 प्रतिशत पद हरियाणा में पड़े हैं खाली

Edited By Ajay Kumar Sharma, Updated: 24 Nov, 2022 08:48 PM

narcotics bureau fighting against drug smugglers with half capacity

ओलंपिक खेलों में भारत के लिए मेडल उगलने वाला हरियाणा नशे की गिरफ्त में जकड़ता जा रहा है।

स्पेशल डेस्क (रवि प्रताप सिंह): ओलंपिक खेलों में भारत के लिए मेडल उगलने वाला हरियाणा नशे की गिरफ्त में जकड़ता जा रहा है। पिछले तीन साल का डेटा उठाए तो ये साफ झलकता है कि नशा तस्करों में पुलिस का खौफ नाकाफी है। वहीं, दूसरी ओर हरियाणा राज्य नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एचएसएनसीबी) भी स्टाफ की कमी से जुझ रहा है। एचएसएनसीबी की 11 यूनिट के 380 पोस्ट स्वीकृत हैं। लेकिन इनमें से 175 पद खाली पड़े हैं यानी 46 प्रतिशत कर्मचारियों की कमी है। तय संख्या के मुकाबले केवल 205 कर्मचारी और पुलिसकर्मी ही काम कर रहे हैं। इनमें 79 पद कॉन्सटेबल या ड्राइवर, 28 हेड-कॉन्सटेबल चार असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर, 4 इंस्पेक्टर, 44 ग्रुप डी कर्मचारी, 6 क्लर्क, 1 स्टेनो, एक पर्सनल असिस्टेंट, 2 एसिस्टेंट और तीन डिप्टी सुपरीटेनडेंट्स ऑफ ऑफिस भरे जाने बाकी हैं। इसके अलावा 1 डीआईजी रैंक के ऑफिसर और 2 एसपी के पद भी स्वीकृत हैं। आधी क्षमता के साथ चल रहे विभाग पर पूरे प्रदेश के नशा तस्करों पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है। मौजूदा समय में एचएसएनसीबी ने बेहतर तरीके से काम करने के लिए 17 यूनिट्स बनाने की मांग करी है।

 

नवंबर तक 3350 ड्रग्स के मामले दर्ज हुए

 

वर्ष 2016 में उड़ता पंजाब फिल्म आई थी। इसके चलते पंजाब में नशे कारोबार को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी। हरियाणा के युवा भी पंजाब के युवाओं की तरह ही नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 6 नवंबर तक 3350 ड्रग्स से जुड़े केस दर्ज हो चुके हैं और ड्रग्स के विभिन्न कारणों के चलते 84 लोगों की जान चली गई है। पिछले वर्ष ड्रग्स के 2745 मामले दर्ज हुए थे जो कि इस साल के मुकाबले कम थे।

 

 

 

चिट्टे ने प्रदेश को अपनी चपेट में लिया

 

सुत्रों की माने तो चिट्टा और एमडीएमए का नशा प्रदेश के युवाओं में अधिक प्रचलित है। इसी के चलते इन दोनों ड्रग्स ने प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया है। इसका सबसे अधिक प्रभाव हिसार, जींद, सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अम्बाला और पंचकुला में साफ दिखता है। हालांकि पुलिस ने इस पर लगाम चलाने के लिए अपनी मुहिम तेज कर दी है, लेकिन इसके परिणाम आने अभी बाकी हैं।

 

दिग्विजय चौटाला को झेलनी पड़ी शर्मिंदगी

 

हरियाणा की बीजेपी-जजपा सरकार को विपक्ष नशे के मामले में घेरने की कोशिश करती रहती है। अक्सर विपक्ष आरोप लगाता है कि पुलिस नशा माफियों से मिली हुई है। दुष्यंत के भाई दिग्विजय चौटाला को इस साल अक्टूबर में उस समय शर्मींदगी का सामना करना पड़ा जब एक युवा ने खुले आम कहा कि आप पुलिस को एक तरफ करिए, जनता नशा माफियों से खुद निपट लेगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिग्विजय ने तुरंत फतेहाबाद एसपी को फोन कर बुलाया। नशा तस्करों के खिलाफ युद्ध छेड़ने की बात खुद गृहमंत्री अनिल विज भी इस साल मानसून सत्र के दौरान कह चुके हैं। वैसे, नशा तस्करों के खिलाफ अभियान को तेज करने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का निर्माण किया गया है। लेकिन जमीन पर अभी इसके परिणाम देखना बाकी है।

 

 

 

प्रदेश के राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी की नशे से मौत

 

प्रदेश में ड्रग्स के चलते मौतों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। नशे की चपेट में आम युवा के साथ-साथ खेल की दुनिया में प्रदेश के चेहरा बने रोहतक के पहलवान अजय नांदल का नाम भी सामने आया था। बताया जा रहा है कि इस साल अगस्त में नशे की ओवरडोज से इनकी मौत हो गई थी। अजय अपनी कार में मृत मिला थे और उनकी कार से पुलिस को सफेद पाउडर मिला था। अजय का शरीर नीला पड़ा हुआ था। हालांकि परिवार का कहना है कि वह नशा नहीं करता था। प्रदेश में नशे के चलते वर्ष 2020, 2021 और 2022 में क्रमश: 57,87 और 84 लोगों की मौत हो चुकी है।

 

हरियाणा में इन राश्तों से होता है नशा तस्करी

 

हरियाणा में अधिकतर अफीम पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रास्ते आती है। स्मैक, ब्राउन सुगर और हिरोइन पंजाब और नई दिल्ली से, चरस, गांजा और अन्य नशीले पदार्थ दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और नेपाल के रास्ते पहुंचते हैं। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बुलाई गई अंतर-राज्य बैठक में, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट रूप से नशा तस्करी के लिए पड़ोसी राज्यों पंजाब, राजस्थान और नई दिल्ली को दोषी ठहराया था। 

 

32 करोड़ की संपत्ति जब्त  

 

सरकार ने कार्रवाई करते हुए 253 नशा तस्करों से 32 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करी है। साथ ही 20 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। इसके अलावा पुलिस स्थानीय प्रशासन के साथ संयुक्त टीम बनाकर दोषी नशा तस्करों के अवैध संपत्तियों को भी तोड़ रहा है।

 

युवाओं को खोखला बनाते ये जहर

 

  स्मैक- स्मैक अपने आप में कोई नैचुरल प्रोडक्ट नहीं है। इसे मशीन की मदद से अफीम से तैयार किया जाता है। इसके अलावा भी अफीम से कई तरह के नशीले पदार्थ तैयार किए जाते हैं।

 

  चरस-  चरस को कैनेबिस नाम के पौधे से तैयार किया जाता है। इस पौधे से रेजिन नाम का एक चिपचिपा पदार्द निकलता है। इससे ही चरस, हशीश और हैश कहा जाता है।

 

   अफीम- अफीम एक विशेष प्रकार का पौधा होता है। इसकी खेती की जाती है। इससे निकलने वाले मार्फिन से विभिन्न नशे बनते हैं। अफीम से विशेष प्रकार के तरल निकालने के लिए कच्चे, ‘फल’ में एक चीरा लगाया जाता है। फिर इसे सुखाया जाता है, जिससे अफीम बनता है।

 

  हेरोइन- हेरोइन अफीम से ही बनता है। हेरोइन में भी मार्फिन होता है, जो मेडिकल क्षेत्र में दर्दनिवारक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि अफीम और एसिटिक मिलाकर हेरोइन को तैयार किया जाता है जिसे डाई एसिटिल कहा जाता है।

 

  गांजा-  गांजा कैनेबिस पौधे के फूल से तैयार किया जाता है। फिर इसे सुखाकर और जलाकर धुएं के रूप में लिया जाता है

 

  भांग-  भांग एक विशेष प्रकार के पौधे की पत्तियों से बनती है। ये आम तौर पर उत्तर भारत में खुद ही उग जाता है। इस पौधे के दो प्रकार होते हैं नर और मादा। नर की पत्तियों से भांग बनती है और भांग के मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों को सुखाकर गांजा बनाया जाता है।

 

  ब्राउन शुगर- ब्राउन शुगर अफीम से बनती है। ये भी पाउडर के रुप में होता है। इसमें 20 प्रतिशत हेरोइन होती है। इसे विशेष प्रकार से तैयार करके बनाया जाता है।

 

 एमडीएमए (MDMA): इसका का पूरा नाम Methylenedioxymethamphetamine है।   MDMA एक तरह का सिंथेटिक ड्रग है, जो उत्तेजना और मतिभ्रम के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे शरीर में अचानक ऊर्जा की वृद्धि होती है और उसके सोचने समझने का तरीका एकदम बदल जाता है।

 

चिट्टा- चिट्टा ऐसा नशा है जिसके एक या दो बार सेवन करने के बादकोई भी इसका आदी हो जाता है। इसे छुड़ाने के लिए कई बार मरीज को भर्ती भी करना पड़ता है।  सफेद रंग के पाउडर सा दिखने वाला ये नशा सिंथेटिक ड्रग्स है। हेरोइन के साथ कुछ केमिकल्स मिलाकर इसे तैयार किया जाता है।

 

नशा रोधी केंद्र में भर्ती मरीज                                               

वर्ष      मरीजों की संख्या

2015    44653

2016    57995

2017    70082

2018    101599

2019    116311

2020     108426

2021      115587

2022     110000

 

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