Edited By Isha, Updated: 26 Apr, 2026 11:10 AM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मोरनी हिल्स क्षेत्र में सर्वे और डिमार्केशन कार्य को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अदालत के समक्ष राज्य की ओर से बताया गया कि गत
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मोरनी हिल्स क्षेत्र में सर्वे और डिमार्केशन कार्य को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अदालत के समक्ष राज्य की ओर से बताया गया कि गत 16 अप्रैल से पहले ही सर्वे और सीमांकन कार्य शुरू कर दिया गया था। सरकार ने यह भी कहा कि टैंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कार्य एक कंपनी को आबंटित कर दिया गया है, जिसे 10 दिनों के भीतर काम शुरू करने सांसद के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सुनवाई दिन ही दस्तावेज दायर करने पर हाईकोर्ट ने सरकार पर 20,000 रुपए जुर्माना लगाया है।
अदालत को बताया गया कि 22 अप्रैल को टैंडर खोला और स्वीकृत किया गया तथा आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी ढांचा पहले ही तैयार कर लिया गया था। हालांकि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्त्ता पक्ष अधिवक्ता सजल बंसल ने इन दावों का विरोध करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। उनके अनुसार सर्वे कार्य वास्तव में शुरू ही नहीं हुआ है। उन्होंने दलील दी कि 20 पटवारियों की तैनाती जरूर की गई है लेकिन वे अनुभवहीन हैं और कई जरूरी दस्तावेज अभी भी उपलब्ध म नायब तहसीलदार चले गए हैं और बजट से संबंधित समस्याएं भी बनी हुई हैं, जिससे कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा।
अदालत ने इस विरोधाभास को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सरकार के आवेदन से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि 16 अप्रैल से पहले कार्य शुरू कर दिया गया था और नि 45 एकड़ में काम पूरा होने का दावा स किया गया है। ऐसे में इस दावे की सत्यता की जांच आवश्यक है।
अदालत ने याचिकाकर्त्ता के वकील को निर्देश दिया कि वह संबंधित अधिकारी (एफ.एस.ओ.) से निर्देश लेकर अगली सुनवाई में स्पष्ट करें कि सरकार द्वारा किए गए दावे तथ्यात्मक रूप से सही हैं या नहीं। अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।