Edited By Manisha rana, Updated: 04 Feb, 2026 02:12 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद को किसी के घर में जबरदस्ती घुसने, गाली-गलौज और मारपीट जैसे कृत्यों का बहाना मानने से साफ इनकार करते हुए ऐसी ही एक एफ. आई. आर. को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है।
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद को किसी के घर में जबरदस्ती घुसने, गाली-गलौज और मारपीट जैसे कृत्यों का बहाना मानने से साफ इनकार करते हुए ऐसी ही एक एफ. आई. आर. को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल यह कह देना कि पति दूसरी शादी कर रहा था या पारिवारिक विवाद चल रहा था, किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता। जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह की एकलपीठ ने कहा कि एफ.आई.आर. को रद्द करने की शक्ति बहुत सीमित है और इसका प्रयोग केवल दुर्लभ परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जब प्रथम दृष्टया कोई अपराध बनता ही न हो। इस मामले में याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनकी सच्चाई की जांच ट्रायल के दौरान ही हो सकती है, न कि शुरुआती चरण में याचिका खारिज करवाकर।
मामला यमुनानगर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 7 अप्रैल 2017 को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पूजा समारोह के दौरान वंदना त्यागी और उसके परिजनों ने उनके घर में जबरदस्ती घुसकर गाली-गलौज की, बर्तन फेंके और उनके तथा उनकी बेटी से मारपीट की। आरोप है कि वंदना ने कहा कि उसका पति दूसरी शादी कर रहा है और वह इस विवाह को रोकने आई है। इस घटना के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि एफ. आई. आर. झूठी है और कानून के दुरुपयोग के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है। वे अपने रिश्तेदार की कथित अवैध शादी को रोकने गए थे और उनके साथ पुलिस भी मौजूद थी। वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपियों के खिलाफ स्पष्ट रूप से जबरदस्ती प्रवेश, अपमानजनक भाषा और शारीरिक हिंसा के आरोप हैं तथा जांच में इसके पर्याप्त आधार सामने आए हैं।