ब्रिटेन में गलत तरीके से वीजा रद्द होने के बाद हरियाणा के छात्र को मिला न्याय, 26 लाख से ज्यादा का मुआवजा

Edited By Deepak Kumar, Updated: 24 Jul, 2025 12:23 PM

haryana student gets compensation for visa wrongly cancelled in uk

हरियाणा के एक छात्र को ब्रिटेन के होम ऑफिस से £22,500 यानी लगभग ₹26.2 लाख का मुआवजा मिला है। यह राशि छात्र की स्वतंत्रता छिनने, मानसिक पीड़ा और अवसरों के नुकसान के लिए दी गई है।

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा के एक छात्र को ब्रिटेन के होम ऑफिस से £22,500 यानी लगभग ₹26.2 लाख का मुआवजा मिला है। यह मुआवजा हाईकोर्ट की किंग्स बेंच डिवीजन, लंदन, में पूर्व सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल, हरियाणा, सुखविंदर नारा  की लॉ फर्म सॉलिसिटर्स लॉ फर्म द्वारा दायर एक मामले के बाद तय हुआ, जिसमें छात्र की 27 दिनों की अवैध हिरासत को चुनौती दी गई थी। यह राशि छात्र की स्वतंत्रता छिनने, मानसिक पीड़ा और अवसरों के नुकसान के लिए दी गई है।

यह छात्र वैध स्टूडेंट वीजा पर ब्रिटेन में रह रहा था, जब 13 नवंबर 2024 को इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसके कार्यस्थल पर छापा मारा। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि छात्र ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए तय 20 घंटे साप्ताहिक काम की सीमा से अधिक काम किया था। उसी दिन उसका वीजा रद्द कर दिया गया और उसे हिरासत में ले लिया गया। बाद में 21 नवंबर 2024 को उसे भारत वापस भेजने के आदेश जारी कर दिए गए और उसे इमिग्रेशन रिमूवल सेंटर में रखा गया।

छात्र ने वीजा रद्द करने और भारत वापिस भेजने की कार्यवाही का सामना करते हुए नारा सॉलिसिटर्स नामक लंदन स्थित लॉ फर्म को अपने केस के लिए नियुक्त किया, नारा सॉलिसिटर्स ने हाई कोर्ट में न्यायिक पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसमें वीजा रद्द करने और हिरासत की वैधता दोनों को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि होम ऑफिस ने काम के घंटों के पालन का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं किया और हिरासत स्वतंत्रता से वंचित करने के कानूनी मानकों को पूरा नहीं करती थी। यह याचिका 28 नवंबर 2024 को हाई कोर्ट में दायर की गई। इसके तुरंत बाद 9 दिसंबर 2024 को छात्र का वीजा बहाल कर दिया गया और 10 दिसंबर 2024 को उसे हिरासत से रिहा कर दिया गया।

होम ऑफिस ने मामले को सेटल करने के लिए शुरू में £17,500 का मुआवजा देने की पेशकश की थी। नारा सॉलिसिटर्स ने अधिक मुआवजे के लिए जोर दिया और अंततः £22,500 का समझौता तय किया गया। इस समझौते में कानूनी खर्चों को अलग से चुकाने पर भी सहमति हुई।

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