Haryana : इस जिले के 3 नगर पार्षदों की सदस्यता रद्द, साढ़े चार साल तक चुनाव लड़ने पर बैन, जानिए क्या है वजह...

Edited By Manisha rana, Updated: 18 Feb, 2026 07:03 PM

haryana membership of 3 municipal councilors of this district cancelled banned

हरियाणा में 3 पार्षदों को चुनाव आयोग के नियमों का पालन नहीं करना इतना महंगा पड़ गया कि चुनाव आयोग ने उनकी सदस्यता को रद्द

जींद (अमनदीप पिलानिया): जिले के 3 पार्षदों को चुनाव आयोग के नियमों का पालन नहीं करना महंगा पड़ गया है। चुनाव आयोग ने चुनावी खर्च का ब्यौरा नहीं देने पर जींद नगर परिषद के दो पार्षदों व उचाना नगर पालिका के एक पार्षद की सदस्यता को रद्द कर दिया गया है और उन पर अगले साढ़े चाल साल तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया है। चुनाव आयोग ने जिन पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया है, उसमें नगर परिषद जींद के वार्ड-17 की पार्षद सुशीला चहल और वार्ड-21 के पार्षद सतपाल कुंडू, उचाना नगरपालिका के वार्ड-12 की पार्षद गीता शामिल है। 

हरियाणा चुनाव आयोग की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि इस आर्डर के मिलने के 45 दिनों के अंदर राज्य चुनाव आयोग के सामने ये पार्षद रिव्यू के लिए आयोग में अपील कर सकते हैं। चुनावी खर्च का ब्योरा एक माह के अंदर जमा नहीं करने पर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने 26 सितंबर 2025 को तीनों पार्षदों को अयोग्य ठहरा दिया था।

जिला निर्वाचन अधिकारी के फैसले के खिलाफ तीनों पार्षदों ने राज्य चुनाव आयोग में अपील की थी। नगर परिषद जींद के आम चुनाव 19 जून 2022 को हुए थे और नतीजा 22 जून को घोषित किया था। नियमानुसार चुनाव नतीजे घोषित होने की तारीख से 30 दिनों के अंदर इन पार्षदों ने खर्च का ब्योरा जमा नहीं करवाया। जिसके चलते डीसी ने 26 सितंबर 2025 को पार्षद सुशीला चहल, सतपाल कुंडू और गीता को पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया था। जिसके बाद तीनों ने राज्य चुनाव आयोग में फैसले के खिलाफ अपील की।

29 जनवरी को आयोग ने तीनों पार्षदों को पर्सनल हियरिंग का मौका दिया और उनका पक्ष सुना। पार्षदों की तरफ से सुनवाई के दौरान जो तथ्य रखे गए, उनको ध्यान में रखते हुए राज्य चुनाव आयुक्त देवेंद्र सिंह ने राहत देते हुए अयोग्यता के पांच साल में से छह माह कम कर दिए। यानि तीनों पांच साल की बजाय साढ़े चार साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगे।

आयोग की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि अगर कोई चुना हुआ प्रधान या सदस्य एक्ट के सेक्शन 13एफ या 13एच के तहत चुनाव खर्च का स्टेटमेट जमा न करने की वजह से अयोग्य हो जाता है, तो राज्य चुनाव आयोग सुनवाई का मौका देने के बाद हटाने का आर्डर पास करता है। इस नियम के तहत पार्षद सुशीला चहल, सतपाल कुंडू को नगर परिषद जींद और गीता को उचाना नगरपालिका के सदस्य के पद से हटा दिया गया है।

पार्षद सुशीला चहल ने कहा कि अभी उनके पास रिव्यू का मौका है। जल्द ही राज्य चुनाव आयोग में इस फैसले के रिव्यू यानि पुनर्निरीक्षण के लिए अपील करेंगे। उन्हें उम्मीद हैं कि फैसला उनके हम में आएगा। परिवार में मौत होने की वजह से वे समय पर चुनाव खर्च जमा नहीं करवा पाए थे। 29 जनवरी को सुनवाई के दौरान उन्होंने अपना खर्च का ब्यौरा भी जमा करवा दिया है। उन्होंने कहा कि फैसले के रिव्यू के लिए अपील करेंगे।

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