47 हजार एकड़ में बढ़ेंगे हरियाणा के शहर, 27 शहर-कस्बों के बाहर जमीन जुटाने की कवायद; 31 अक्टूबर तक ई-भूमि पर मांगे प्रस्ताव

Edited By Harman, Updated: 01 Oct, 2026 05:41 PM

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हरियाणा के शहरों की अगली सीमा अब खेतों के बीच तय होगी। प्रदेश में 27 शहरों और कस्बों के बाहर करीब 47 हजार एकड़ जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस जमीन पर भविष्य में रिहायशी सेक्टरों के साथ बाजार, संस्थान और दूसरी शहरी सुविधाएं विकसित करने की...

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा के शहरों की अगली सीमा अब खेतों के बीच तय होगी। प्रदेश में 27 शहरों और कस्बों के बाहर करीब 47 हजार एकड़ जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस जमीन पर भविष्य में रिहायशी सेक्टरों के साथ बाजार, संस्थान और दूसरी शहरी सुविधाएं विकसित करने की गुंजाइश रखी जाएगी। भू-स्वामियों और एग्रीगेटरों से 31 अक्टूबर तक ई-भूमि पोर्टल पर जमीन के प्रस्ताव मांगे गए हैं। जमीन जुटाने के पैमाने से विस्तार की तस्वीर भी सामने आती है। फरीदाबाद में 11,895.73 एकड़ और झज्जर में 10,982.30 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। दोनों का आंकड़ा 22,878 एकड़ से ज्यादा है। इसके साथ सांपला में 6,767.17 और रोहतक में 6,122.71 एकड़ का प्रस्ताव है। इन चार इलाकों में ही करीब 35,768 एकड़ जमीन आती है।

चार इलाकों में ही 35 हजार एकड़ से ज्यादा
फरीदाबाद, झज्जर, सांपला और रोहतक के बाद यमुनानगर-जगाधरी का नंबर है, जहां 4,712.02 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। नारनौल में 2,621.89, खरखौदा में 2,395.18, बावल में 1,981 और रेवाड़ी में 1,946.45 एकड़ जमीन सूची में है। रतिया के लिए 1,750 एकड़ का प्रस्ताव है। इसके बाद प्रस्तावित भू-क्षेत्र कई हिस्सों में बंट जाता है। शाहाबाद में 1,473.10, उचाना में 1,412.58, गुरुग्राम में 1,314.99, हथीन में 892.51, नीलोखेड़ी-तरावड़ी में 830.43 और पंचकूला एक्सटेंशन-अलीपुर में 800.23 एकड़ जमीन रखी गई है। सफीदों 614.80 एकड़ के साथ इस सूची में है। जमीन का यह फैलाव सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है। एनसीआर के बड़े शहरी केंद्रों से लेकर दक्षिण हरियाणा और मध्य हरियाणा के कस्बों तक प्रस्तावित भू-क्षेत्र फैले हुए हैं। इससे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में शहरों के विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध कराने की कवायद का पैमाना सामने आता है।

छोटे कस्बे भी शहरी विस्तार की जद में
सूची में सिर्फ बड़े शहर नहीं हैं। नारनौंद, उकलाना, सफीदों, असंध, इंद्री, अग्रोहा, इसराना, गन्नौर, गोहाना, समालखा, मतलौडा, बेरी और जुलाना जैसे कस्बों के आसपास भी जमीन प्रस्तावित की गई है। उकलाना में 802.30 एकड़, सफीदों में 614.80, असंध में 391.67, नारनौंद में 266.83 और इंद्री में 261.89 एकड़ का प्रस्ताव है। तलवंडी राणा-बहलबापुर के लिए 295.82, भूना के लिए 299.05 और फतेहाबाद के लिए 281.36 एकड़ जमीन सूची में है। गन्नौर, गोहाना, इसराना, मतलौडा, बेरी और जुलाना जैसे कस्बों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे शहरों के बाहर जमीन जुटाने की कवायद का दायरा बड़े औद्योगिक या एनसीआर शहरों से आगे जाता दिखता है।

कहीं हजारों एकड़, कहीं सिर्फ कुछ दर्जन
प्रस्तावित जमीन का आकार शहर-दर-शहर काफी अलग है। बड़े शहरी केंद्रों के लिए हजारों एकड़ के भू-क्षेत्र हैं, जबकि छोटे कस्बों में आंकड़ा कुछ एकड़ तक सिमट जाता है। रायपुर रानी में 7.40, घरौंडा में 16.80, समालखा में 16, जुलाना में 22.01 और बरवाला में 23.46 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। इससे सूची में शामिल शहरों और कस्बों के लिए जमीन की जरूरत का पैमाना अलग-अलग दिखाई देता है। कहीं पूरा नया शहरी विस्तार खड़ा करने जितनी जमीन है तो कहीं सीमित भू-क्षेत्र में स्थानीय जरूरतों के हिसाब से विस्तार की गुंजाइश रखी गई है।

यमुनानगर से नारनौल तक फैला भूगोल
प्रस्तावित जमीन का भूगोल भी खासा व्यापक है। उत्तर में यमुनानगर-जगाधरी और पंचकूला एक्सटेंशन से लेकर मध्य हरियाणा के रोहतक, सांपला, उचाना, सफीदों और गोहाना तक जमीन की सूची पहुंचती है। दक्षिण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, बावल और नारनौल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम के हिस्से में रतिया, फतेहाबाद और भूना जैसे क्षेत्र भी सूची में हैं। ऐसे में 47 हजार एकड़ का प्रस्ताव प्रदेश के अलग-अलग शहरी केंद्रों को कवर करता है।

नए सेक्टरों के साथ बाजार और संस्थानों की भी जगह
प्रस्तावित भू-क्षेत्रों का इस्तेमाल केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं रखा गया है। योजना में रिहायशी, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल विकास के लिए जमीन जुटाने की बात है। इससे नए सेक्टरों के साथ बाजार, दफ्तर, शिक्षण संस्थान और दूसरी सार्वजनिक गतिविधियों के लिए भी भू-क्षेत्र उपलब्ध कराया जा सकेगा। शहरों के विस्तार में सबसे बड़ी जरूरत अक्सर केवल आवास की नहीं होती। आबादी बढ़ने के साथ सड़क, बाजार, स्कूल, संस्थान और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भी जगह चाहिए। प्रस्तावित लैंड बैंक में इन जरूरतों को समेटने की गुंजाइश रखी गई है।

ई-भूमि पर 31 अक्टूबर तक जमीन ऑफर
फिलहाल प्रक्रिया जमीन की पेशकश के चरण में है। भू-स्वामी और एग्रीगेटर 31 अक्टूबर तक ई-भूमि पोर्टल पर अपनी जमीन ऑफर कर सकते हैं। इसके बाद प्रस्तावित भू-क्षेत्रों की जांच और चयन से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस स्तर पर किसी खास जमीन पर सेक्टर विकसित करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अभी अलग-अलग शहरों और कस्बों के बाहर उपलब्ध जमीन जुटाने का आधार तैयार किया जा रहा है। आगे इसी आधार पर शहरी विस्तार की योजनाएं आकार लेंगी।

इन इलाकों में प्रस्तावित जमीन
फरीदाबाद 11,895.73 एकड़, झज्जर 10,982.30, सांपला 6,767.17, रोहतक 6,122.71, यमुनानगर-जगाधरी 4,712.02, नारनौल 2,621.89, खरखौदा 2,395.18, बावल 1,981, रेवाड़ी 1,946.45, रतिया 1,750, शाहाबाद 1,473.10, उचाना 1,412.58, गुरुग्राम 1,314.99, हथीन 892.51, नीलोखेड़ी-तरावड़ी 830.43, उकलाना 802.30, पंचकूला एक्सटेंशन-अलीपुर 800.23 और सफीदों 614.80 एकड़।

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