मेक इन हरियाणा नीति 2026 का बड़ा दांव, ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर को मिला 'थ्रस्ट' दर्जा...कंपनियों को मिलेगा एक्स्ट्रा 5% इंसेंटिव

Edited By Isha, Updated: 16 Jul, 2026 10:47 AM

green hydrogen sector granted  thrust  status

स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत एक नई छलांग लगाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन का शुभारंभ करेंगे। यह केवल भारतीय रेलवे के लिए ही नहीं, बल्कि

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत एक नई छलांग लगाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन का शुभारंभ करेंगे। यह केवल भारतीय रेलवे के लिए ही नहीं, बल्कि देश में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इसी के साथ हरियाणा भी ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार नीति निर्माण, औद्योगिक प्रोत्साहन, बड़े निवेश, अनुसंधान तथा विनिर्माण क्षमता के विकास के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन का एक सशक्त औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में जुटी हुई है।

हरियाणा सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए इसे अपनी विकास रणनीति में प्रमुख स्थान दिया है। राज्य के ऊर्जा विभाग के अंतर्गत हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण  द्वारा एक समर्पित ग्रीन हाइड्रोजन नीति तैयार की जा रही है। इस नीति का मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया जा चुका है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, भंडारण, परिवहन, कौशल विकास तथा निवेश को बढ़ावा देना है। साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उपयुक्त वित्तीय सहायता, सब्सिडी तथा विभिन्न प्रोत्साहनों का भी प्रावधान किया जा रहा है।

2030 तक 2.5 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

प्रस्तावित नीति के अनुसार वर्ष 2030 तक हरियाणा में प्रतिवर्ष 250 किलो टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही राज्य में 2 गीगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण क्षमता विकसित करने का भी लक्ष्य रखा गया है। नीति का उद्देश्य उद्योगों के डी-कार्बोनाइजेशन को गति देना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, स्वच्छ ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा ग्रीन हाइड्रोजन एवं उसके डेरिवेटिव्स के निर्यात को प्रोत्साहित करना है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक हरियाणा में ग्रीन हाइड्रोजन की मांग लगभग 300 किलो टन प्रतिवर्ष तक पहुँच सकती है, जिसे देखते हुए राज्य अभी से आवश्यक औद्योगिक आधारभूत संरचना विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

'मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026' में मिला विशेष स्थान

हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी 'मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026' ने भी ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता प्रदान की है। इस नीति में ग्रीन हाइड्रोजन को 'थ्रस्ट सेक्टर' के रूप में शामिल किया गया है। थ्रस्ट सेक्टर वे क्षेत्र हैं जिनमें राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत है तथा जो भविष्य में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नीति के अंतर्गत थ्रस्ट सेक्टर में निवेश करने वाली इकाइयों को पूंजीगत अनुदान पर अतिरिक्त 5 प्रतिशत टॉप-अप प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। इससे ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयों, इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, फ्यूल सेल, हाइड्रोजन भंडारण, परिवहन उपकरण, विशेष रसायनों तथा अन्य सहायक उद्योगों में निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
'मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026' का उद्देश्य हरियाणा को उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य के उद्योगों का केंद्र बनाना है। ग्रीन हाइड्रोजन को थ्रस्ट सेक्टर में शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित विनिर्माण को औद्योगिक विकास का प्रमुख आधार बनाना चाहती है।

पानीपत में स्थापित हो रहा है देश की अग्रणी परियोजनाओं में से एक संयंत्र

हरियाणा के पानीपत में एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक द्वारा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की रिफाइनरी के लिए 10,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह परियोजना अगले 25 वर्षों तक पानीपत रिफाइनरी को ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति करेगी। इससे वर्तमान में उपयोग किए जा रहे जीवाश्म ईंधन आधारित हाइड्रोजन का स्थान ग्रीन हाइड्रोजन लेगा, जिसके परिणामस्वरूप रिफाइनरी के कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसे भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मिलेगा बल
हरियाणा की पहल भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करना, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा आयात में कमी लाना तथा उद्योगों, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। इस मिशन के अंतर्गत देश में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, अनुसंधान, नवाचार तथा निवेश को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।


हरियाणा के पक्ष में कई रणनीतिक मजबूतियां

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में हरियाणा को कई स्वाभाविक लाभ प्राप्त हैं। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, विकसित औद्योगिक आधार, मजबूत सड़क एवं रेल संपर्क, पानीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार और यमुनानगर जैसे औद्योगिक केंद्र, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में निरंतर वृद्धि तथा बड़े ऊर्जा उपभोक्ता उद्योगों की उपलब्धता राज्य को ग्रीन हाइड्रोजन निवेश के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।

राज्य में रिफाइनरी, इस्पात, रसायन, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग तथा विनिर्माण उद्योगों की मजबूत उपस्थिति ग्रीन हाइड्रोजन की मांग को भी बढ़ावा देगी। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, उपकरण विनिर्माण, पाइपलाइन, भंडारण, लॉजिस्टिक्स तथा इंजीनियरिंग सेवाओं से जुड़े अनेक सहायक उद्योगों के विकसित होने की भी संभावना है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश का सृजन होगा।

स्वच्छ ऊर्जा के नए युग की ओर हरियाणा

प्रधानमंत्री द्वारा हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ, हरियाणा की प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 'मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026' के अंतर्गत विशेष प्रोत्साहन, पानीपत में विकसित हो रही देश की अग्रणी ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना तथा राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के साथ राज्य का तालमेल इस बात का संकेत है कि हरियाणा केवल ग्रीन हाइड्रोजन का उपभोक्ता नहीं, बल्कि इसके उत्पादन, विनिर्माण, अनुसंधान और निर्यात का भी एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यदि प्रस्तावित योजनाएं निर्धारित समय के अनुसार लागू होती हैं, तो हरियाणा देश की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने वाले राज्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है।


 

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