Edited By Isha, Updated: 25 Apr, 2026 06:04 PM

हरियाणा में पिछले करीब एक दशक से चल रहे सिस्टम के डिजिटलाइजेशन के अभियान को अब एक नई धार मिली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राजस्व विभाग की पेचीदगियों से आम जनता को
डेस्क: हरियाणा में पिछले करीब एक दशक से चल रहे सिस्टम के डिजिटलाइजेशन के अभियान को अब एक नई धार मिली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राजस्व विभाग की पेचीदगियों से आम जनता को निजात दिलाने के लिए 'सिटीजन हेल्पडेस्क' का पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर लॉन्च कर दिया है। सरकार का सीधा संदेश है—अगर काम में देरी हुई या किसी ने रिश्वत की मांग की, तो अब उसकी जवाबदेही 48 घंटे के भीतर तय होगी।
अक्सर देखा जाता था कि रजिस्ट्री के लिए टोकन लेने के बाद भी फाइलें हफ्तों तक धूल फांकती रहती थीं या तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर लोगों को परेशान किया जाता था। नई व्यवस्था के तहत अब समय की लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है, यदि आवेदन के 5 दिनों के भीतर टोकन मंजूर नहीं होता, तो प्रार्थी सीधे शिकायत कर सकता है।टोकन मिलने के बाद 10 दिन के भीतर अप्वाइंटमेंट लेना जरूरी होगा, वरना टोकन स्वतः रद्द हो जाएगा। अप्वाइंटमेंट मिलने के 20 दिनों के भीतर संपत्ति का पंजीकरण (रजिस्ट्री) पूरा करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका 'केंद्रीकृत मॉनिटरिंग डैशबोर्ड' है। इसका सीधा एक्सेस चंडीगढ़ में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों के पास होगा। यानी, किसी भी तहसील या उप-तहसील में अगर कोई शिकायत पेंडिंग रहती है, तो ऊपर बैठे अधिकारी तुरंत उसका संज्ञान लेंगे। पेपरलेस पंजीकरण के दौरान आने वाली समस्याओं के लिए शिकायतकर्ता को अपना टोकन नंबर देना होगा, जिससे उसकी फाइल की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
आम नागरिक अपनी शिकायतें कार्यदिवस के दौरान सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच दर्ज करवा सकेंगे। सरकार ने इसके लिए एक समर्पित टोल-फ्री नंबर और ईमेल आईडी जारी की है। यह डेस्क केवल तकनीकी खामियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी काम के बदले अवैध वसूली या उत्पीड़न करता है, तो उसके खिलाफ भी यहाँ प्रमाण के साथ शिकायत की जा सकती है।राजस्व विभाग के इस 'कायाकल्प' को सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि धरातल पर यह हेल्पडेस्क कितनी तेजी से अपनी छाप छोड़ पाता है।