Edited By Harman, Updated: 22 Oct, 2026 03:17 PM
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) की केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा
लखनऊ/पंचकूला : हरियाणा के बिजली कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ता परिषद का समर्थन मिल गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) की केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) द्वारा 19 अक्टूबर 2026 को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के आदेश के विरुद्ध पुनर्विलोकन याचिका दाखिल की है। याचिका में आदेश की समीक्षा करने तथा अंतिम निर्णय होने तक उसके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है।
2023 में नोएडा–गाजियाबाद में अडानी की समानांतर लाइसेंस याचिका का विरोध, अब हरियाणा में भी उपभोक्ता हितों की लड़ाई
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद वही संस्था है, जिसने वर्ष 2023 में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गाजियाबाद में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अडानी समूह की कंपनियों द्वारा उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में दाखिल याचिका का विरोध किया था। उस मामले में परिषद को आपत्तिकर्ता के रूप में स्वीकार किया गया था और अडानी समूह को समानांतर वितरण लाइसेंस नहीं मिल सका।
परिषद का कहना है कि वर्ष 2023 में नोएडा–गाजियाबाद प्रकरण में उठाए गए उपभोक्ता हितों और मौजूदा वितरण व्यवस्था से जुड़े सवाल आज भी प्रासंगिक हैं। अब हरियाणा में भी परिषद ने समानांतर लाइसेंस देने के आदेश के वित्तीय, तकनीकी और नियामकीय पहलुओं की समीक्षा की मांग करते हुए आयोग का दरवाजा खटखटाया है। परिषद का स्पष्ट पक्ष है कि बिजली वितरण जैसे जनहित के क्षेत्र में किसी भी दीर्घकालिक निर्णय से पहले उपभोक्ताओं, मौजूदा नेटवर्क और सार्वजनिक निवेश पर पड़ने वाले प्रभावों का गंभीर परीक्षण होना चाहिए।
₹4,716.73 करोड़ के प्रस्तावित निवेश की वित्तीय क्षमता पर सवाल
पुनर्विलोकन याचिका में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की वित्तीय पात्रता और प्रस्तावित निवेश की व्यवस्था की जांच की मांग की गई है। याचिका में उल्लिखित विवरण के अनुसार, कंपनी का प्रस्तावित कुल निवेश ₹4,716.73 करोड़ है, जिसमें ₹1,415.02 करोड़ की इक्विटी और ₹3,301.71 करोड़ का ऋण शामिल है। इसके मुकाबले लगभग ₹1 करोड़ की चुकता शेयर पूंजी, ₹91 करोड़ के प्रारंभिक इक्विटी निवेश और लगभग ₹205 करोड़ की सैद्धांतिक ऋण स्वीकृति का उल्लेख करते हुए शेष धनराशि की वास्तविक उपलब्धता और वित्तीय प्रतिबद्धताओं की जांच का अनुरोध किया गया है।
वर्मा के अनुसार, केवल निवेश की घोषणा या सैद्धांतिक ऋण स्वीकृति के आधार पर यह मान लेना पर्याप्त नहीं है कि प्रस्तावित परियोजना के लिए सभी आवश्यक धनराशि समय पर उपलब्ध हो जाएगी। आयोग को यह परीक्षण करना चाहिए कि कंपनी के पास वितरण नेटवर्क विकसित करने, बिजली आपूर्ति के दायित्व निभाने और उपभोक्ताओं को नियमानुसार सेवाएं देने के लिए पर्याप्त तथा विश्वसनीय वित्तीय संसाधन हैं या नहीं।
मौजूदा बिजली नेटवर्क और उपभोक्ताओं पर संभावित वित्तीय भार की जांच जरूरी
याचिका में मौजूदा वितरण कंपनियों के सबस्टेशन, फीडर, भूमिगत केबल, स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था और अन्य परिसंपत्तियों के उपयोग पर समानांतर नेटवर्क के संभावित प्रभाव की समीक्षा की मांग की गई है। उपभोक्ताओं के संभावित स्थानांतरण, अतिरिक्त पूंजीगत व्यय, नेटवर्क विकास की समय-सीमा और इनसे उत्पन्न संभावित लागत का उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का भी परीक्षण करने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त, ग्रिड कनेक्टिविटी, तकनीकी तैयारी, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, शिकायत निस्तारण, बिलिंग पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े दायित्वों को स्पष्ट तथा प्रभावी बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
अंतरिम रोक सहित उचित राहत की मांग
अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग से अनुरोध किया है कि वह पुनर्विलोकन याचिका की ग्राह्यता और लागू कानूनी आवश्यकताओं पर विचार करते हुए, यदि कानून के अंतर्गत पुनर्विलोकन का आधार पाया जाए, तो 19 अक्टूबर 2026 के आदेश में आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करे। साथ ही, याचिका के अंतिम निस्तारण तक लाइसेंस के क्रियान्वयन और उससे जुड़ी आगे की कार्रवाइयों पर अंतरिम रोक लगाने पर विचार किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं, सार्वजनिक निवेश और मौजूदा बिजली वितरण व्यवस्था के हितों की रक्षा की जा सके।
वर्मा ने कहा कि वर्ष 2023 में नोएडा–गाजियाबाद में अडानी की समानांतर लाइसेंस याचिका का विरोध करने से लेकर अब हरियाणा में इलेवन पावर को लाइसेंस देने के आदेश के पुनर्विलोकन की मांग तक, परिषद का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों को नियामकीय प्रक्रिया में प्रभावी रूप से सामने रखना है। प्रत्येक मामले का निर्णय संबंधित आयोग को कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करना है, लेकिन किसी भी दीर्घकालिक लाइसेंस में वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारी, सार्वजनिक निवेश और उपभोक्ता हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।