कोचिंग संस्थान FIIT JEE को वापस करनी होगी छात्र से ली गई फीस का आधा हिस्सा, कंज्यूमर फोरम के आदेश

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 18 Jul, 2026 06:13 PM

consumer fourm directed to fiit jee to refund 50 percent fees

कोचिंग संस्थानों की मनमानी और एकतरफा नियमों पर नकेल कसते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (कंज्यूजमर फोरम) गुरुग्राम ने बड़ा फैसला सुनाया। फोरम ने साफ किया है कि कोचिंग सेंटरों के अनुबंधों में शामिल नो-रिफंड की एकतरफा शर्तें उपभोक्ता अधिकारों से...

गुड़गांव, (ब्यूराे): कोचिंग संस्थानों की मनमानी और एकतरफा नियमों पर नकेल कसते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (कंज्यूजमर फोरम) गुरुग्राम ने बड़ा फैसला सुनाया। फोरम ने साफ किया है कि कोचिंग सेंटरों के अनुबंधों में शामिल नो-रिफंड की एकतरफा शर्तें उपभोक्ता अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकती हैं। आयोग ने प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान  FIIT JEE  लिमिटेड को शहर के एक परिवार की आधी फीस यानी एक लाख 15 हजार 650 रुपये वापस करने का सख्त निर्देश दिया है।

गुरुग्राम की ताजा खबरों के लिए लिंक  https://www.facebook.com/KesariGurugram  पर क्लिक करें।

 

इसके साथ ही फोरम ने  FIIT JEE  को 8 मार्च 2021 से इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक उत्पीड़न के लिए 30 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूपये में 22 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है। आयोग ने संस्थान को भुगतान करने के लिए 45 दिनों का समय दिया है। यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया, तो कुल राशि पर 12% वार्षिक ब्याज लागू होगा।

 

मामला साल 2020 का है, जब आलोक अग्रवाल, राखी गोपाल अग्रवाल और उनके बेटे ने ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के लिए  FIIT JEE के दो-वर्षीय इंटीग्रेटेड प्रोग्राम में दाखिला लिया था। शिकायत के अनुसार परिवार ने प्रवेश, ट्यूशन, टेस्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और किताबों के नाम पर लगभग 2.43 लाख रुपये का भुगतान किया था। पहला शैक्षणिक वर्ष पूरा होने के बाद छात्र ने IIT प्रवेश परीक्षा की तैयारी न करने का फैसला किया और 2021 में कोर्स से नाम वापस ले लिया। परिवार ने किताबों की कीमत छोड़कर केवल ट्यूशन और अन्य मदों की 50% फीस वापसी की मांग की, लेकिन  FIIT JEE  ने अपने नियमों का हवाला देते हुए साफ मना कर दिया। थक-हारकर मार्च 2021 में परिवार ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।

 

सुनवाई के दौरान  FIIT JEE  ने प्रवेश समझौते के क्लॉज का हवाला देते हुए अपना बचाव किया। संस्थान का तर्क था कि एक बार भुगतान की गई फीस किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं की जा सकती और बीच में कोर्स छोड़ने वाले छात्र किसी भी रिफंड के हकदार नहीं हैं। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने  FIIT JEE  के इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि अनुबंध के ये प्रावधान पूरी तरह से मनमाने, एकतरफा और असमान हैं। ऐसी शर्तें वहां लागू नहीं की जा सकतीं जहां उपभोक्ताओं के पास मोलभाव करने की समान शक्ति नहीं होती।

 

आयोग ने आगे तीखी टिप्पणी करते हुए कहा पूरे दो साल के कार्यक्रम के लिए एक बार में ही भारी फीस वसूलना-चाहे छात्र कोर्स जारी रखे या नहीं-पूरी तरह से अनुचित, अतार्किक और अन्यायपूर्ण है। फोरम ने इस प्रथा को भ्रामक और अनुचित व्यापार व्यवहारका एक क्लासिक उदाहरण माना और संस्थान को सेवाओं में कमी को दोषी ठहराया है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!