क्लेम भुगतान में बीमाधारक को किया परेशान, कंज्यूमर कोर्ट की फटकार, ब्याज सहित देनी होगी रकम

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 28 Jul, 2026 07:12 PM

consumer forum order to pay claim amount with interest

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उपचार कराने और बीमा कंपनी की तरफ से शिकायतकर्ता को सही से सेवा न देने पर उपभोक्ता आयोग ने दोनों को दोषी ठहराया है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित यशोदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उपचार कराने और बीमा कंपनी की तरफ से शिकायतकर्ता को सही से सेवा न देने पर उपभोक्ता आयोग ने दोनों को दोषी ठहराया है। आयोग ने दोनों को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 11.63 लाख रुपये नौ प्रतिशत के ब्याज दर से देने का आदेश दिया है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।

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जानकारी के मुताबिक, सेक्टर-15 पार्ट- दो निवासी नीरज कुमार सिंघल ने उपभोक्ता आयोग में दायर की याचिका में बताया कि जून 2022 में उनको पीठ में दर्द हुआ था। इस पर उन्होंने अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विवेक कुमार से परामर्श लिया था और उनकी रिपोर्ट के आधार पर बीमा पॉलिसी खरीदते समय दिखाई गई थी। उन्होंने निवा भुपा कंपनी से अपना स्वास्थ्य बीमा कराया हुआ था। 2022 में उन्होंने पिछले साल मार्च और अप्रैल में उन्होंने यशोदा अस्पताल में कोलन कैंसर के उपचार के लिए भर्ती हुए थे। वहां पर उपचार के लिए अस्पताल प्रबंधन ने उनसे 5.36 लाख रुपये लिए थे।

 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बिना जीएसटी के बिल बनाया और उनसे जबरन रुपये लिए गए। नौ अप्रैल को उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती होने पड़ा, जिस पर उनका पांच लाख 72 हजार रुपये का बिल आया,लेकिन बीमा कंपनी ने सिर्फ 3.80 लाख रुपये का बिल मंजूर किया। सर्जरी की जटिलताओं के चलते उन्हें एक बार फिर अस्पताल में भर्ती हुए और इस बार बीमा कंपनी ने उन्हें रुपये नहीं दिए। इस मामले में न तो अस्पताल प्रबंधन की तरफ से आयोग में दलील दी गई और न ही बीमा कंपनी की तरफ से कोई पेश हुआ। आयोग ने दस्तावेज के आधार पर यशोदा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, बीमा कंपनी और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ के वरिष्ठ डॉक्टर विवेक कुमार को आदेश दिया है कि वह 11.63 लाख रुपये शिकायतकर्ता को दें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी होने पर 50 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 22 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।

 

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