पंचकूला और अंबाला के कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से मान्यता मिले: विजय बंसल

Edited By Manisha rana, Updated: 15 Nov, 2025 01:56 PM

colleges in panchkula and ambala should be recognised by punjab university

शिवालिक विकास मंच प्रदेशाध्यक्ष एंव कांग्रेस पूर्व प्रदेश सचिव विजय बंसल एडवोकेट ने गृहमन्त्री अमित शाह और सीएम नायब सैनी को ज्ञापन भेजकर जिला पंचकूला और जिला अंबाला के सभी कॉलेजो को पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता दिलावाने की मांग की।

चंडीगढ़ (धरणी) : शिवालिक विकास मंच प्रदेशाध्यक्ष एंव कांग्रेस पूर्व प्रदेश सचिव विजय बंसल एडवोकेट ने गृहमन्त्री अमित शाह और सीएम नायब सैनी को ज्ञापन भेजकर जिला पंचकूला और जिला अंबाला के सभी कॉलेजो को पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता दिलावाने की मांग की। उन्होने बताया कि उन्होने मांग की है कि आगामी 17 नवंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में फरीदाबाद में होने वाली नॉर्दर्न जोनल काउंसिल की बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाकर जिला पंचकूला और अंबाला जिले के सभी कॉलेजों को पंजाब यूनिवर्सिटी से दोबारा अटैच करवाने का कष्ट करें। विगत 9 जुलाई 2022 को जयपुर में हुई नॉर्दर्न जोनल काउंसिल की बैठक में भी हरियाणा ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था लेकिन पंजाब ने इसका कड़ा विरोध किया था।

विजय बंसल एडवोकेट ने बताया कि 1 नवंबर 1976 तक हरियाणा के कई कॉलेज पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंधित थे लेकिन उसके बाद यह व्यवस्था खत्म कर दी गई थी। वर्ष 2008 में भी शिवालिक विकास मंच की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर स्थानीय कॉलेजो को दोबारा पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंध करने की मांग की थी। बंसल ने बताया कि इतना ही नहीं पंचकूला राजकीय कॉलेज में एलएलबी की कक्षाएं आरंभ करने की भी मांग वर्ष 2008 में सरकार से की गई थी लेकिन उसे आज तक पूरा नहीं किया गया है। बंसल ने कहा कि हरियाणा का अपनी राजधानी चंडीगढ़ में बराबर का हिस्सा है और जबकि पहले भी यहां के कॉलेज पंजाब यूनिवर्सिटी से एफिलिएटिड थे तो इन्हें दोबारा से यूनिवर्सिटी से जोड़ा जाना कोई गलत बात नहीं है बल्कि यह जिला पंचकूला और अंबाला के युवाओं को उच्च शिक्षा दिलाने के अधिकार का विषय है।

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में हरियाणा की हिस्सेदारी फायदे वाली होगी क्योंकि यहां देश से भी अच्छे अंक लेकर पढ़ने वाले बच्चे आते हैं उनके साथ हरियाणा के बच्चे पढ़ेंगे तो प्रतिस्पर्धा के लिए उनकी शिक्षा भी बेहतर होगी। हालांकि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी भी अच्छी है लेकिन इंटरनेशनल स्तर पर पंजाब यूनिवर्सिटी की भागीदारी अधिक है इसलिए हरियाणा के बच्चों का दाखिला सीधा होना चाहिए इसके अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी में हिस्सेदारी होने से सीनेट में भी हरियाणा के सदस्य होंगे इससे यूनिवर्सिटी के फैसलों पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

उन्होने बताया कि पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में 92 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार का जबकि 4 फीसदी हरियाणा और 4 फीसदी पंजाब का हिस्सा था। लेकिन तत्कालीन बंसीलाल सरकार के वक्त एक कार्यक्रम में हुए विवाद के बाद हरियाणा सरकार ने अपना हिस्सा हटा दिया था उसके बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी बनी थी। इससे महत्वपूर्ण फैसले लेने वाली सीनेट की सदस्यता भी अब हरियाणा के पास नहीं है। यदि हिस्सेदारी मिले तो मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और एसीएस एजुकेशन डिपार्टमेंट के साथ कुछ अन्य को भी सीनेट की सदस्यता मिल सकती है क्योंकि सीनेट ही यूनिवर्सिटी में अहम फैसले लेती है। हिस्सेदारी न होने से पंजाब के सदस्यों की संख्या ज्यादा बढ़ गई है। वहीं सदस्यता खत्म होने पर हरियाणा ने फंड देने भी बंद कर दिया था। अब हरियाणा 8 की बजाए 20 करोड़ रुपए तक देने को तैयार है। पूर्व में इसे लेकर कोर्ट में हरियाणा राज्य सरकार शपथ पत्र भी दे चुकी है। हालांकि पंजाब पीयू का पेरेंट्स स्टेट है इसलिए उसकी अप्रूवल जरूरी है लेकिन पंजाब सरकार सहमति नहीं दे रही है।

जिला पंचकूला के कालका, पिंजौर, दून, रायतन, मोरनी आदि दूरदराज के क्षेत्र के हजारों की संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी पर ही निर्भर है लेकिन कुरुक्षेत्र यहां से लगभग 120 किलोमीटर से भी अधिक दूर है जहां आने-जाने में छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विजय बंसल ने बताया कि वैसे भी अब जिला पंचकूला और अंबाला की आबादी बहुत अधिक हो चुकी है दर्जनों कॉलेज खुल चुके हैं लेकिन विशेष कर जिला पंचकूला में कोई यूनिवर्सिटी नहीं है। मजबूरन छात्रों को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी वाले कॉलेज में ही दाखिला लेना पड़ता है। जबकि पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ पंचकूला और अंबाला के बेहद नजदीक है। स्थानीय छात्रों को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलना टेढ़ी खीर साबित होता है क्योंकि पंजाब यूनिवर्सिटी में चंडीगढ़ के छात्रों के लिए 85 प्रतिशत तक का आरक्षण है जबकि शेष 15 प्रतिशत हरियाणा, पंजाब सहित पूरे देश के छात्रों के लिए सीटे हैं जो बहुत कम है इसी कारण हरियाणा के छात्र पंजाब यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं क्योंकि इन छात्रों के दाखिले के लिए मेरिट 90 प्रतिशत से ज्यादा रहती है। इसी वजह से विशेष कर कालका, पिंजौर और जिला पंचकूला के छात्र दसवीं कक्षा के बाद 11वीं में दाखिले के लिए चंडीगढ़ के स्कूलों का रुख करते हैं जिस कारण पंचकूला जिले के सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में छात्रों की संख्या कम रहती है।

बंसल ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के सिनेट चुनाव के लिए हरियाणा में भी वोटें हैं छात्र संघ चुनावों में भी जिला पंचकूला और जिला अंबाला के छात्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है तो फिर पंचकूला और अंबाला क्षेत्र के युवाओं को उनका हिस्सा क्यों नहीं दिया जाना चाहिए जिसके युवा हकदार भी हैं। बंसल ने कहा कि अब तो नायब सिंह सैनी तो जिला पंचकूला और जिला अंबाला क्षेत्र से पहली बार हरियाणा का मुख्यमंत्री बने है और हरियाणा में और केंद्र में भी बीजेपी सरकार है और चंडीगढ़ हरियाणा की भी राजधानी है चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है इसलिए पूर्ण आशा है कि इस बार जिला पंचकूला और अंबाला के कॉलेजो को पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता मिल जाएगी और शिवालिक क्षेत्र के छात्रों को भी उच्च शिक्षा के लिए अच्छी यूनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण करने का अवसर प्राप्त होगा।

 

 

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