हंगामेदार रह सकता है हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र, बेरोज़गारी सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

Edited By Manisha rana, Updated: 15 Feb, 2026 12:35 PM

budget session of the haryana assembly may be stormy

हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी शुक्रवार से शुरू होने वाला है।सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण के साथ होगी और उसके बाद विधायी मुद्दों, बजट और प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी शुक्रवार से शुरू होने वाला है।सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण के साथ होगी और उसके बाद विधायी मुद्दों, बजट और प्रस्तावों पर चर्चा होगी। बजट सत्र वह विशेष विधानसभा सत्र है जिसमें सरकार अपने अगले वित्तीय वर्ष (यहाँ 2026-27) के राज्य बजट की प्रस्तुति, चर्चा और पारित करती है। इसमें विभागों को लिए धन आवंटन, नीतिगत घोषणाएं, और सरकारी योजनाओं पर विस्तृत बहस होती है। 

हंगामेदार रह सकता है हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र 

हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र 2026 हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे बेरोज़गारी, किसानों की समस्याएँ, महंगाई, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे। विपक्षी दलों, विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बजट सत्र के दौरान स्थगन प्रस्ताव और कार्य रोको प्रस्ताव लाने की रणनीति बनाई है। वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर है और सत्र के दौरान सभी सवालों का तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा। सरकार की कोशिश रहेगी कि सत्र सुचारू रूप से चले और विकास से जुड़े एजेंडे पर चर्चा हो।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के चलते बजट सत्र के कई दिन हंगामे की भेंट चढ़ सकते हैं।

सत्र की तैयारी और राजनीतिक गतिविधियाँ

बजट सत्र से पहले हरियाणा सरकार ने जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं ताकि बजट में आम लोगों की अपेक्षाएँ भी शामिल हो सकें। विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  ने बजट सत्र में स्थगन प्रस्ताव और कार्य रोको प्रस्ताव लाने की रणनीति तैयार की है। 

मुख्यमंत्री का फोकस

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का कहना है कि बजट तैयार करते समय जनता की अपेक्षाओं व सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी न सिर्फ़ कागज़ पर बल्कि नीतिगत रूप में भी। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र 2026 में विपक्ष जनता से जुड़े मूलभूत मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। सरकार से यह पूछा जाएगा कि पिछले वर्षों में किए गए वादों का क्या हुआ और आम आदमी की जिंदगी में वास्तविक सुधार क्यों नहीं दिख रहा।

बेरोज़गारी और भर्ती घोटाले

प्रदेश का युवा बेरोज़गारी की मार झेल रहा है। सरकारी भर्तियाँ समय पर पूरी नहीं हो रहीं और बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाओं से युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है। सरकार बताए कि कितनी भर्तियाँ लंबित हैं और कब तक सभी प्रक्रियाएँ पूरी होंगी।

किसानों की बदहाली

किसान आज भी फसल की उचित कीमत और समय पर मुआवज़े के लिए संघर्ष कर रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, सिंचाई सुविधा और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई पर सरकार की स्पष्ट नीति क्या है?

महंगाई ने तोड़ी आम आदमी की कमर

पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आम परिवार का मासिक बजट बिगड़ चुका है। सरकार बताए कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए बजट में क्या ठोस प्रावधान किए गए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है। मरीजों को दवाइयाँ तक बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। सरकार बताए कि स्वास्थ्य बजट बढ़ाने और सुविधाएँ सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। भवन जर्जर हैं और डिजिटल सुविधाएँ नाकाफी हैं। सरकार बताए कि शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए इस बजट में क्या नई पहल की जाएगी।

कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा

प्रदेश में अपराध बढ़ रहे हैं और महिलाएँ खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। पुलिस बल की कमी और संसाधनों के अभाव को दूर करने के लिए सरकार क्या ठोस योजना लाई है?

बजट की प्राथमिकताएँ

सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। विपक्ष मांग करता है कि बजट में गरीब, किसान, मजदूर, महिला और युवा वर्ग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

प्री बजट से समीक्षा कर रहे हैं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 

हरियाणा सरकार वर्ष 2026-27 के बजट से पहले व्यापक स्तर पर प्री-बजट परामर्श की प्रक्रिया चला रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विभिन्न वर्गों—किसान, व्यापारी, उद्योगपति, युवा, महिला संगठन, कर्मचारी संघ, पत्रकार, शिक्षाविद और सामाजिक संस्थाओं—से लगातार संवाद कर उनकी राय और सुझाव ले रहे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जन-आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होना चाहिए। सरकार का उद्देश्य ऐसा बजट प्रस्तुत करना है, जो समाज के हर वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करे। प्री-बजट बैठकों में रोज़गार, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े सुझावों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इन सभी सुझावों को संकलित कर बजट में यथासंभव शामिल करने का भरोसा मुख्यमंत्री ने दिया है।

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