बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर ने रोका 6 करोड़ का साइबर फ्रॉड, पुलिस ने किया सम्मानित

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 21 Nov, 2025 01:10 PM

axis bank relationship manager rewarded by police for exposing cyber fraud

बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 64 लाख रुपए ट्रांसफर कराए जाने के मामले में जहां साइबर अपराध ईस्ट थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है वहीं, इस मामले में बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर को सराहनीय कार्य करने के लिए सम्मानित भी किया है।

गुड़गांव,(ब्यूरो): बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 64 लाख रुपए ट्रांसफर कराए जाने के मामले में जहां साइबर अपराध ईस्ट थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है वहीं, इस मामले में बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर को सराहनीय कार्य करने के लिए सम्मानित भी किया है। मैनेजर ने बैंक खाते से एक साथ 64 लाख रुपए की ट्रांजेक्शन होने पर न केवल बैंक खाते को फ्रीज कर अमाउंट को होल्ड कर दिया बल्कि 6 करोड़ रुपए की ठगी को भी टाल दिया। रिलेशनशिप मैनेजर के इस सराहनीय कार्य के लिए गुड़गांव पुलिस ने उन्हें 20 हजार रुपए का इनाम और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है।

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पुलिस के मुताबिक, एक बुजुर्ग को साइबर ठगों ने डराकर लाखों रुपए की ट्रांजेक्शन करा ली थी। ठगों ने स्वयं को मुंबई से सीबीआई अधिकारी बताते हुए उनके दस्तावेज अवैध कार्यों में प्रयोग होने की बात कही थी और बुजुर्ग को करीब 20 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट किया गया। इस दौरान उन्होंने बुजुर्ग के बैंक खाते में म्यूचुअल फंड की करीब 5 करोड़ 90 लाख रुपए की राशि को क्रेडिट कराया और उन्हें केस से बाहर निकालने की ऐवज में रुपयों की मांग की थी। अरेस्ट होने के डर से बुजुर्ग ने साइबर ठगों के बताए गए बैंक खातों में 64 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसमें से 20 लाख रुपए 11 नवंबर को SBI गोलमुरी जमशेदपुर, झारखण्ड ब्रान्च में व 12 नवंबर को 44 लाख रुपए एक्सिस बैंक बांद्रा, मुंबई ब्रांच में ट्रांसफर हुए थे। अचानक हुई इस ट्रांजेक्शन के बाद बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर मीत सबरवाल ने बैंक खातों को फ्रीज कर दिया और उन्होंने बुजुर्ग से संपर्क किया, लेकिन बुजुर्ग ने डर के मारे उन्हें कुछ नहीं बताया। काफी काउंसलिंग करने के बाद बुजुर्ग ने आपबीती बताई। जिसके बाद उन्हाेंने पुलिस को शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

 

वहीं, रिलेशनशिप मैनेजर मीत सबरवाल ने मुंबई बांद्रा ब्रांच में संपर्क कर बैंक खाते को अनफ्रीज न करने का आग्रह किया जहां से उन्हें पता लगा कि खाता धारक स्थानीय बैंक मैनेजर पर यह बैंक खाता अनफ्रीज करने का दबाव बना रहा है जिस पर उन्होंने इस खाते के संबंध में स्थानीय पुलिस को भी सूचना देने का बैंक मैनेजर से आग्रह किया। जिसके बाद यह ट्रांसफर की गई 64 लाख रुपए की राशि को होल्ड कर दिया और इसे पीड़ित के बैंक खाते में रिवर्ट करने का प्रोसेस शुरू कर दिया है। 

 

रिलेशनशिप मैनेजर मीत सबरवाल के इस सराहनीय कार्य के कारण एक बड़े साइबर फ्रॉड को रोक लिया गया। पीड़ित ने बताया कि साइबर ठगों के डरे के मारे ही उन्होंने अपने म्यूचुअल फंड की राशि को बैंक खाते में क्रेडिट किया था। यह राशि भी आरोपियों को ट्रांसफर की जानी थी। वहीं, पुलिस ने रिलेशनशिप मैनेजर के इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें 20 हजार रुपए नकद व एक प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया है। इस दौरान नीरज जैन (सर्किल हेड एक्सिस बैंक), परशान्ता राय चौधरी (ब्रांच कन्ट्रोल हेड एक्सिस बैंक DLF, गुरुग्राम), वी. सीतालक्ष्मी (ब्रांच हेड एक्सिस बैंक DLF, गुरुग्राम) व अश्विनी अरोड़ा (ऑपेरशन हेड एक्सिस बैंक DLF, गुरुग्राम) उपस्थित रहे।

 

पुलिस के मुताबिक, मीत सबरवाल पिछले सात साल से एक्सिस बेंक की ग्लेरिया मार्केट ब्रांच में कार्यरत हैं। इनकी कुशल कार्यशैली, अच्छे अनुभव से उपरोक्त शिकायकर्ता के बैंक खाते से हुई ट्रांजेक्शन को होल्ड कराकर साईबर ठगों द्वारा की गई उपरोक्त ठगी की वारदात को आसानी से पुलिस टीम द्वारा निष्क्रय कराया जा सका। पुलिस के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर विकास अरोड़ा के निर्देशानुसार एसीपी साइबर अपराध प्रियांशु दीवान द्वारा प्रत्येक माह में 1 बार बैंक मैनजरों, बैंक प्रतिनिधियों, बैंक कर्मचारियों के साथ मीटिंग की जाती है। इस मासिक मीटिंग में सहायक पुलिस आयुक्त साइबर अपराध द्वारा सभी बैंक प्रतिनिधियों/कर्मचारियों को निर्देश दिए जाते हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह से बैंक में फर्जी बैंक खाता न खुलवा सकें, इसलिए बैंक में खाता खुलवाने वाले व्यक्ति व उसके दस्तावेजों की अच्छे से जांच करके ही बैंक खाते खोले। किसी भी बैंक खाते से कोई बड़ी ट्रांजेक्शन्स होती है तो बैंक खाताधारक से सम्पर्क करके उन ट्रांजेक्शन्स के बारे में अवगत कराते हुए उनकी जानकारी प्राप्त करें और यदि कोई फ्रॉड/अवैध या अज्ञात ट्रांजेक्शन पाई जाए तो खाता धारक को साईबर अपराध के हेल्पलाईन नम्बर 1930 पर तुरन्त कॉल करके शिकायत दर्ज कराने तथा सम्बन्धित पुलिस को सूचित करने के बारे में बताए।

 

 बैंक के किसी भी अधिकारी/कर्मचारी को किसी भी तरह से किसी बैंक खाते में कोई भी लेनदेन में संदिग्ध लगे तो तुरन्त उसकी सूचना पुलिस को दें, ताकि उस लेनदेन की पुष्टि करके उसका समाधान हो सके और साइबर ठगी की राशि को रिफंड कराकर उस ठगी को निष्क्रिय कराया जा सके। फर्जी व किराए के पते पर खोले गए बैंक खातों (Mule Accounts) पर निगरानी रखे साथ ही नए खुले या कमजोर वित्तीय पृष्ठभूमि वाले बैंक खातों में अचानक बड़े लेनदेन हों तो उनकी भी तुरंत जांच करें। बैंक शाखा द्वारा साइबर सुरक्षा को सुदृढ करने के लिए संदिग्ध खातों की मासिक समीक्षा करें और ग्राहक सत्यापन रजिस्टर अपडेट रखें।

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