'हर बार नई डॉक्यूमेंट्री, किरदार वही केवल चेहरे बदलते हैं'... कांग्रेस के धरने पर अनिल विज का तीखा वार

Edited By Harman, Updated: 21 Jul, 2026 05:44 PM

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अनिल विज ने कहा कि हर बार संसद सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष कोई नया मुद्दा, नई कहानी या नई "डॉक्यूमेंट्री" लेकर सामने आ जाता है। किरदार वही रहते हैं, केवल चेहरे बदल जाते हैं। उनका कहना था कि यह विपक्ष की पुरानी रणनीति है, जिसके जरिए जनता का ध्यान...

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा दिल्ली में कथित लाठीचार्ज के विरोध में दिए गए धरने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद के प्रत्येक सत्र से पहले विपक्ष इसी तरह का "राजनीतिक खेल" खेलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल संसद की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करना और राजनीतिक माहौल बनाना होता है।

अनिल विज ने कहा कि हर बार संसद सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष कोई नया मुद्दा, नई कहानी या नई "डॉक्यूमेंट्री" लेकर सामने आ जाता है। किरदार वही रहते हैं, केवल चेहरे बदल जाते हैं। उनका कहना था कि यह विपक्ष की पुरानी रणनीति है, जिसके जरिए जनता का ध्यान भटकाने और संसद की कार्यवाही को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है।

विज ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सैकड़ों लोगों को लेकर सीधे संसद या लोकसभा परिसर में प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में संसद के भीतर इस प्रकार के प्रदर्शन की इजाजत नहीं होती। उन्होंने कहा कि जनता ने सांसदों को चुनकर संसद में अपनी बात रखने के लिए भेजा है। यदि किसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना है तो उसे संसद के भीतर लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाना चाहिए। विज ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद के भीतर अपनी बात रखने के बजाय वे सड़कों पर राजनीति करना अधिक पसंद करते हैं, जबकि जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी सदन में जनता की आवाज उठाना है।

महात्मा गांधी के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए विज ने कहा कि कांग्रेस के नेता अक्सर अपने आंदोलनों की तुलना महात्मा गांधी से करते हैं, जबकि दोनों में कोई समानता नहीं है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा अहिंसक आंदोलन किए और कभी भी पुलिस पर पथराव या हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। इसलिए वर्तमान विरोध प्रदर्शनों की तुलना गांधीजी के आंदोलनों से करना उचित नहीं है। पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस के हमलों का जवाब देते हुए विज ने कहा कि राहुल गांधी बार-बार परीक्षा पत्र लीक होने की बात करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि कांग्रेस शासन के दौरान कौन-सी ऐसी परीक्षा थी जिसमें विवाद नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय किसी मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया था। वर्तमान सरकार पेपर लीक के मामलों को गंभीरता से ले रही है और दोषियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अनिल विज ने कांग्रेस पर केवल विरोध की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह "बाधा पार्टी" बन चुकी है। उनका कहना था कि जब भी संसद का सत्र आता है, कांग्रेस किसी न किसी बहाने से राजनीतिक नौटंकी की पटकथा तैयार कर देती है ताकि सदन की कार्यवाही प्रभावित हो। उन्होंने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उन्हें वास्तव में पेपर लीक की इतनी चिंता होती तो वे विदेश यात्राओं में व्यस्त रहने के बजाय इस मुद्दे पर गंभीरता से काम करते। विज ने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष की जिम्मेदार भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल धरना-प्रदर्शन करना, राजनीतिक विवाद खड़ा करना और सरकार के कामकाज में बाधा उत्पन्न करना रह गया है।

विज ने कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और रचनात्मक विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन केवल विरोध के लिए विरोध करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद सत्र के दौरान विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करेगा, न कि केवल राजनीतिक टकराव की रणनीति अपनाएगा।
 

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