राजस्थानी लोक-संस्कृति, साहित्य और संगीत का भव्य संगम बना साई का आँगन का 24वाँ वसंत उत्सव

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 11 Feb, 2026 07:51 PM

the 24th vasant utsav of sai ka aangan became a grand confluence of rajasthani

हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित साई का आँगन में 24वें वसंत उत्सव का भव्य आयोजन सी.बी.एस कल्चरल फ़ाउंडेशन के सहयोग से डॉ. चंद्रभानु सतपथी जी के पावन मार्गदर्शन और सान्निध्य में संपन्न हुआ।

गुड़गांव, ब्यूरो : हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित साई का आँगन में 24वें वसंत उत्सव का भव्य आयोजन सी.बी.एस कल्चरल फ़ाउंडेशन के सहयोग से डॉ. चंद्रभानु सतपथी जी के पावन मार्गदर्शन और सान्निध्य में संपन्न हुआ। डॉ.सतपथी जो एक आध्यात्मिक चिन्तक, समाजसेवी और विगत 35 वर्षों से वैश्विक स्तर पर साईं आंदोलन और उनकी शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर कार्यरत हैं, के मार्गदर्शन में यह आयोजन केवल वसंत ऋतु के स्वागत तक सीमित न रहकर, भारतीय सांस्कृतिक परंपरा एवं साहित्यिक साधना का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया है। इस अवसर पर डॉ. सतपथी की दूरदर्शी सांस्कृतिक सोच विशेष रूप से दृष्टिगोचर हुई, जिसके अंतर्गत उन्होंने वसंत उत्सव को प्रतिवर्ष भारत के किसी एक राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा, जिसका उद्देश्य देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना है। साई का आँगन का यह आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति को समझने के साथ-साथ अन्य संस्कृतियों के प्रति सम्मान और समझ विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्थान की पारंपरिक कच्छी घोड़ी नृत्य मंडली के साथ, मुख्य अतिथि डॉ. चंद्र भानु सतपथी जी के आगमन उनके पारंपरिक स्वागत एवं औपचारिक अभिनंदन के साथ हुई। तत्पश्चात मंगलाचरण के साथ दीप प्रज्वलन हुआ। इसके उपरांत साई का आँगन के बच्चों द्वारा भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति दी गई। 

 

उत्सव का प्रमुख आकर्षण डॉ.सतपथी जी द्वारा रचित ‘श्रीगुरु भागवत’ ग्रन्थ खंड-आठ के हिंदी अनुवाद के साथ ही प्रथम खंड के संताली, डोगरी और उर्दू अनुवादों का लोकार्पण रहा। श्री गुरु भागवत डोगरी भाषा के अनुवादक डॉ. पदम देव सिंह जी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इसके साथ ही डॉ. सतपथी जी ने श्रीगुरु भागवत की डिजिटल संताली संगीत एल्बम के साथ-साथ उर्दू और संस्कृत में प्रार्थनाओं की दो ऑडियोबुक्स भी जारी की।  मूल रूप से उड़िया भाषा के नवाक्षरी काव्य छंद में रचित यह ग्रंथ जीवन, चेतना और आत्मबोध के गहन आयामों को प्रस्तुत करता है। उपस्थित जनसमूह से संवाद करते हुए डॉ. सतपथी जी ने सरस्वती कल्प से वसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डाला और संगीत के माध्यम से सरलता, सजगता तथा आनंद को जीवन में अपनाने पर बल दियाकृजो श्री साईं बाबा की शिक्षाओं की प्रतिध्वनि है। उन्होंने कलाकारों और आयोजकों को धन्यवाद देते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

 

सांस्कृतिक संध्या में साई का आँगन संगीत समूह के बच्चों ने राजस्थानी श्री गुरुभागवत ग्रन्थ की भक्तिमय प्रस्तुतियों एवं भजनो से वातावरण को नई उमंग और ऊर्जा से भर दिया । सुप्रसिद्ध राजस्थानी लोक गायक सरवर ख़ान और सरताज ख़ान के नेतृत्व में प्रस्तुत संगीत जैसे केसरिया बालम एवं घूमर और कालबेलिया जैसी नृत्य प्रस्तुतियों एवं कठपुतली कला के माध्यम से राजस्थान की लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। इसके पश्चात ईथर बैंड के युवा कलाकारों की भारतीय और पाश्चात्य संगीत के संयोजन से सजी प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन पूर्व दूरदर्शन एंकर श्रीमती ज्योत्सना राय ने किया। दूर-दूर से आये कई गणमान्य अतिथियों ने इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई एवं इसके सीधे प्रसारण के माध्यम से देश-विदेश में फैले सभी साई भक्तो ने इसका लाभ उठाया। अंत में “राजस्थानी लोकपरंपरा की सुगंध से परिपूर्ण साईं प्रसाद का आनंद सभी के द्वारा लिया गया। इस प्रकार साई का आँगन का 24वां वसंत उत्सव कला,साहित्य और भारतीय संस्कृति का सजीव संगम बना।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!