Royale Touche: एक पारिवारिक सोच से शुरू हुई डिज़ाइन की कहानी

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 27 Mar, 2026 07:08 PM

royale touche a design story that began with a family vision

कंपनी के सफर में एक बड़ा बदलाव तब आया जब अगली पीढ़ी ने जिम्मेदारी संभाली। राज पटेल और शिव पटेल ने कंपनी के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।

गुड़गांव ब्यूरो :1970 के दशक के अंत में गुजरात में एक छोटे पारिवारिक व्यवसाय के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज भारत के प्रमुख लैमिनेट ब्रांड्स में से एक बन चुकी है। Royale Touche की कहानी सिर्फ एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की नहीं है, बल्कि उस सोच की है जिसमें यह माना गया कि सतह (surface) सिर्फ इस्तेमाल की चीज़ नहीं होती, बल्कि यह हमारे रहने के अनुभव को भी बदल सकती है। कंपनी की शुरुआत चार भाइयों दिनेश पटेल, जितेंद्र पटेल, अरविंद पटेल और भरत पटेल ने की थी। उस समय लैमिनेट को सिर्फ एक साधारण और उपयोगी प्रोडक्ट माना जाता था। लेकिन इन संस्थापकों की सोच अलग थी। उनके लिए लैमिनेट सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि घरों और जगहों का हिस्सा था, जो लोगों के रोज़मर्रा के अनुभव को प्रभावित करता है। अरविंद पटेल का मानना था कि प्रोडक्ट ऐसा होना चाहिए जो इस्तेमाल में आसान हो और लंबे समय तक लोगों के साथ जुड़ा रहे। यही सोच कंपनी की नींव बनी।

 

शुरुआती दौर में कंपनी ने नए प्रयोग किए और दुनिया भर में हो रहे बदलावों पर ध्यान दिया। खासकर यूरोप जैसे बाजारों में हो रहे डिज़ाइन और टेक्नोलॉजी के विकास को समझने की कोशिश की गई। इसी दौरान भारत में भी बेहतर डिज़ाइन वाले इंटीरियर की मांग बढ़ने लगी। कंपनी ने यूरोपीय तकनीक अपनाई और नए डिज़ाइन वाले कैटलॉग पेश किए। उस समय जब आर्किटेक्ट्स और डिजाइनर्स के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे, ये कैटलॉग उनके लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन गए। जैसे-जैसे मांग बढ़ी, कंपनी ने भी अपने काम का विस्तार किया। एक छोटे यूनिट से शुरू होकर यह एक बड़े नेटवर्क में बदल गया जिसमें अलग-अलग शहरों में डिपो, एक्सक्लूसिव शोरूम और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच शामिल थी। इस विस्तार ने Royale Touche को उन शुरुआती भारतीय ब्रांड्स में शामिल किया जिन्होंने लैमिनेट को सिर्फ उपयोग की चीज़ नहीं, बल्कि डिज़ाइन का हिस्सा बनाकर पेश किया।

 

कंपनी के सफर में एक बड़ा बदलाव तब आया जब अगली पीढ़ी ने जिम्मेदारी संभाली। राज पटेल और शिव पटेल ने कंपनी के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने ऐसे सिस्टम बनाए जो कंपनी को बड़े स्तर पर काम करने में मदद करें, लेकिन साथ ही मूल सोच भी बनी रहे। ERP और CRM जैसे डिजिटल सिस्टम लागू किए गए, जिससे स्टॉक, डिलीवरी, खरीद और डीलर्स के साथ काम करना ज्यादा आसान और तेज़ हो गया। पहले जो काम मैन्युअली होता था, वह अब व्यवस्थित और तेज़ तरीके से होने लगा। कंपनी की आंतरिक संस्कृति ने भी इसके विकास में अहम भूमिका निभाई। कई कर्मचारी 20–25 साल से ज्यादा समय से कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने कंपनी को मैन्युअल काम से लेकर आधुनिक मशीनों तक बदलते देखा है। पुराने कर्मचारी अक्सर बताते हैं कि शुरुआत में संस्थापक खुद हर डिस्पैच पर ध्यान देते थे ताकि गुणवत्ता बनी रहे। इस तरह का जुड़ाव कंपनी में स्थिरता और भरोसा लेकर आया। हाल के वर्षों में Royale Touche ने पारिवारिक मूल्यों और आधुनिक बिज़नेस जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखा है। डिजिटल सिस्टम, संगठित रिटेल और नए प्रोडक्ट्स के साथ कंपनी आगे बढ़ी है, लेकिन गुणवत्ता और भरोसे पर उसका ध्यान पहले जैसा ही बना हुआ है। एक छोटे पारिवारिक व्यवसाय से लेकर एक पहचाने जाने वाले ब्रांड बनने तक का यह सफर दिखाता है कि सही सोच, लगातार प्रयास और समय के साथ बदलाव को अपनाने से कैसे एक कंपनी अपनी अलग पहचान बना सकती है। Royale Touche की कहानी भारत के बदलते इंटीरियर और डिज़ाइन उद्योग की भी एक झलक पेश करती है।

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