आयरन की कमी के चलते महिलाओं को होती है थकान व बालों की समस्या: डॉ. सुवर्णा खाडिलकर

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 30 Jan, 2026 07:45 PM

iron deficiency causes fatigue and hair problems in women dr suvarna khadilka

आयरन कोशिकाओं की वृद्धि और मरम्मत में अहम भूमिका निभाता है। आयरन की कमी होने पर बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं, जिससे ज़्यादा बाल झडऩे लगते हैं।

गुडग़ांव, (ब्यूरो): डॉ. सुवर्णा खाडिलकर, सीनियर ऑब्स्टेट्रिशियन, गायनेकोलॉजिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने कहा कि आज की युवा महिलाए कई भूमिकाएं एक साथ निभाती हैं। जिनमें काम, परिवार, सामाजिक जिम्मेदारियाँ और अपनी सेहत का ध्यान शामिल हैं। इतनी व्यस्त जीवनशैली में, अच्छी तरह खाने, पर्याप्त नींद लेने और सक्रिय रहने के बावजूद भी कई महिलाओं को लगातार थकान और बाल झडऩे की समस्या होती है। इसकी वजह आयरन की कमी को नजरअंदाज किए जाना है। डा. सुवर्णा खाडिलकर ने कहा कि आयरन शरीर में ऑक्सीजन को पहुँचाने के लिए बहुत ज़रूरी होता है। इसकी हल्की-सी कमी भी ऊर्जा के स्तर को कम कर सकती है, लगातार थकान ला सकती है, सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है और बालों व त्वचा की सेहत पर असर डाल सकती है। इन शुरुआती संकेतों को समझकर युवा महिलाएँ अपनी ऊर्जा, एकाग्रता और बालों की सेहत को फिर से बेहतर बना सकती हैं। अगर आप सब कुछ "सही" कर रही हैं—समय पर खाना खा रही हैं, सक्रिय रहती हैं और 7–8 घंटे की नींद लेती हैं—फिर भी थकान महसूस होती है, तो अब आयरन लेवल जाँचने का समय हो सकता है। आयरन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन ठीक तरह से नहीं पहुँच पाती, जिससे आराम के बाद भी लगातार थकान रहती है और काम करने की इच्छा या उत्पादकता कम हो जाती है। कई महिलाएँ इसे तनाव या बर्नआउट समझ लेती हैं, जबकि असल में यह शरीर द्वारा आयरन की कमी का संकेत हो सकता है।


बालों का अधिक झडऩा और फीकी त्वचा:
आयरन कोशिकाओं की वृद्धि और मरम्मत में अहम भूमिका निभाता है। आयरन की कमी होने पर बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं, जिससे ज़्यादा बाल झडऩे लगते हैं। बाल रूखे और बेजान दिखने लगते हैं, त्वचा पीली दिखने लगती है। ये छोटे लेकिन ज़रूरी बदलाव अक्सर इस बात के शुरुआती संकेत होते हैं कि शरीर को आयरन की अतिरिक्त ज़रूरत है।


कम स्टैमिना, सांस फूलना और एनीमिया:
अगर आयरन की कमी का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह एनीमिया में बदल सकती है, जिसमें शरीर में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है। एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं को हल्की-सी गतिविधि के बाद भी सांस फूलना, बार-बार सिरदर्द होना और ध्यान लगाने या सतर्क रहने में परेशानी हो सकती है। लंबे काम के घंटों को संभालने वाली युवा प्रोफेशनल महिलाओं के लिए यह उनकी रोज़मर्रा की कार्यक्षमता पर गहरा असर डाल सकता है।


कब जाँच करवानी चाहिए:
अगर आप एक साथ कई लक्षण महसूस कर रही हैं, तो किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह लें। उनसे सीबीसी व फेरिटिन के बारे में पूछें। महिलाओं में अगर एचबी 12 से कम और पुरुषों में एचबी 14 से कम हो, तो आयरन सप्लीमेंट शुरू किए जा सकते हैं। सही जाँच बहुत ज़रूरी है, ताकि समस्या का सही कारण पता चल सके और आपको उचित इलाज मिल सके।


आयरन सप्लीमेंट कैसे मदद करते हैं:

आयर सप्लीमेंट रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अहम भूमिका निभाते हैं। जब आयरन की कमी की पुष्टि हो जाती है, तो सप्लीमेंट शुरू करना ज़रूरी होता है, क्योंकि ये पोषण की कमी को पूरा करते हैं और शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए आवश्यक आयरन देते हैं। हालांकि, व्यस्त जीवनशैली में सिर्फ़ खान-पान के ज़रिए आयरन का सही स्तर बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। आपको ऐसे सप्लीमेंट्स की ज़रूरत है जिन्हें आप आसानी से अपने साथ रख सकें और कभी भी ले सकें। आप अपने लिए उपयुक्त कोई भी आयरन सप्लीमेंट चुन सकती हैं। इस संदर्भ में चबाने वाली आयरन गमीज़ एक आसान और उपयोगी विकल्प हैं—ये साथ ले जाना आसान होती हैं, स्वाद में अच्छी होती हैं और कहीं भी, कभी भी ली जा सकती हैं। इस तरह ये आपकी रोज़ की आयरन ज़रूरत को पूरा करने का एक सरल समाधान देती हैं।


डॉ. सुवर्णा खडिलकर के बारे में:
डॉ. सुवर्णा खडिलकर महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक अनुभव रखने वाली वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी में एमडी किया है और यूके से एंडोक्रिनोलॉजी में डिप्लोमा प्राप्त किया है। वे मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं, साथ ही कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और गायनेकोलॉजिस्ट के रूप में भी सेवाएँ दे रही हैं। वर्तमान में डॉ. खडिलकर एफओजीएसआई (फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया) की सेक्रेटरी जनरल हैं और इससे पहले मुंबई ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी (एमओजीएस) की अध्यक्ष रह चुकी हैं। हार्मोनल स्वास्थ्य, एनीमिया और महिलाओं पर केंद्रित प्रिवेंटिव केयर में उनके योगदान के लिए उन्हें व्यापक रूप से सम्मानित किया गया है।

 

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