Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 01 May, 2026 06:04 PM

गुरुग्राम में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ यातायात पुलिस की सख्ती ने सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
बादशाहपुर,ब्यूरो : गुरुग्राम में शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ यातायात पुलिस की सख्ती ने सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पिछले 10 दिनों में शराब पीकर वाहन चलाने वाले 543 चालकों के चालान होना केवल पुलिस कार्रवाई का आंकड़ा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि शहर की सड़कों पर नशे में स्टेयरिंग थामना गंभीर और जानलेवा लापरवाही बनता जा रहा है। देर रात की पार्टियां, पब-बार संस्कृति, हाईवे ट्रैफिक और तेज रफ्तार के बीच यह प्रवृत्ति आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
चालान से ज्यादा चिंता हादसों की :
शराब पीकर वाहन चलाना सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि सड़क पर चल रहे हर व्यक्ति की जिंदगी को खतरे में डालना है। नशे की हालत में चालक का नियंत्रण, निर्णय क्षमता और प्रतिक्रिया समय कमजोर हो जाता है। ऐसे में जरा सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है। दोपहिया वाहन चालक, पैदल यात्री और परिवार के साथ सफर कर रहे लोग ऐसे लापरवाह चालकों के कारण सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
10 दिन में 543 चालान, डर या जागरूकता की कमी :
गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते शहर में 10 दिनों में 543 चालान यह बताने के लिए काफी हैं कि शराब पीकर वाहन चलाने की प्रवृत्ति अभी भी रुक नहीं रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का पकड़ा जाना दर्शाता है कि या तो कानून का डर कम है या फिर लोग शराब पीकर वाहन चलाने को अब भी सामान्य गलती मानते हैं। यह स्थिति सड़क सुरक्षा अभियान और जनजागरूकता दोनों को और मजबूत करने की जरूरत बताती है।
लाइसेंस निलंबन से बढ़ेगा असर :
यातायात पुलिस द्वारा शराब पीकर वाहन चलाने वालों के चालान के साथ ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने के लिए निलंबित करने की सिफारिश बड़ा कदम है। केवल आर्थिक जुर्माना कई बार वाहन चालकों पर पर्याप्त असर नहीं डालता, लेकिन लाइसेंस निलंबन से उन्हें कानूनी और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इससे ऐसे चालकों में डर और अनुशासन पैदा होने की उम्मीद है।
पब-बार और हाईवे इलाकों में निगरानी जरूरी :
गुरुग्राम में पब, बार, क्लब, होटल और हाईवे किनारे देर रात तक लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे स्थानों के आसपास नियमित नाकाबंदी, ब्रेथ एनालाइजर जांच और विशेष अभियान बेहद जरूरी हैं। खासकर सप्ताहांत, त्योहारों और देर रात के समय पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने से नशे में वाहन चलाने वालों पर रोक लग सकती है।
समाज की भी जिम्मेदारी :
शराब पीकर वाहन चलाने से रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। दोस्तों, परिवार, आयोजन स्थलों और बार संचालकों को भी सतर्क भूमिका निभानी होगी। नशे में व्यक्ति को वाहन न चलाने देना, वैकल्पिक वाहन व्यवस्था कराना और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना समाज की साझा जिम्मेदारी है। गुरुग्राम को सुरक्षित शहर बनाना है तो नशे में स्टेयरिंग पकड़ने की मानसिकता पर सख्ती और जागरूकता दोनों जरूरी हैं।