Edited By Isha, Updated: 08 Jan, 2026 10:44 AM

हरियाणा ने एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) अभियान के तहत उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने यहां बताया कि मई 2022 से अब
डेस्क : हरियाणा ने एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) अभियान के तहत उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने यहां बताया कि मई 2022 से अब तक राज्य में 95 लाख से अधिक लोगों की एनीमिया जांच की जा चुकी है। यह उपलब्धि सतत प्रयासों, विशेष अभियानों और प्रभावी निगरानी प्रणाली का नतीजा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बुधवार को यहां अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव आरएस ढिल्लो, निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव और एनीमिया मुक्त हरियाणा की स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ़ सुनिधि करोल सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आरती सिंह राव ने बताया कि हरियाणा ने वर्ष 2025 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 85.2 प्रतिशत एएमबी कंपोजिट इंडेक्स स्कोर के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में प्रदर्शन और बेहतर हुआ और 90 प्रतिशत स्कोर के साथ राज्य तीसरे स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एनीमिया उन्मूलन के प्रयासों को आगे भी मजबूत करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम की सफलता का में ‘टी-4’ मॉडल यानी टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक ने अहम भूमिका निभाई। इसके तहत जांच के तुरंत बाद इलाज शुरू किया जाता है। आयरन व फोलिक एसिड (आईएफए) की दवाएं दी जाती हैं। आहार परामर्श और नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। इससे मरीजों में सुधार तेज़ी से होता है और बीमारी से उबरना संभव बनता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में एनीमिया की पहचान और उपचार को तेज करने के लिए 100 दिवसीय विशेष अभियान चलाया गया। एनीमिया उन्मूलन सप्ताह चलाए गए, जिन्हें आगे चलकर मार्च और जुलाई 2025 में एनीमिया उन्मूलन माह के रूप में विस्तार दिया गया। इन अभियानों के तहत 17.5 लाख से अधिक लोगों की जांच की गई। 17 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2025 तक सशक्त नारी स्वस्थ परिवार अभियान के दौरान 2.5 लाख लाभार्थियों की जांच हुई। फिर 26 दिसंबर तक चले 100 दिवसीय अभियान में अतिरिक्त 1.5 लाख लोगों की जांच की गई। सभी चिन्हित मरीजों को आईएफए सप्लीमेंट और आहार परामर्श दिया गया।
आरती राव ने कहा कि यह कार्यक्रम 6 से 59 माह और 5 से 9 वर्ष के बच्चों, 10 से 19 वर्ष के किशोरों, 20 से 49 वर्ष की महिलाओं, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताओं तथा अन्य वयस्कों जैसे सभी संवेदनशील वर्गों को कवर करता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में एनीमिया की दर 59.1 प्रतिशत से घटकर 51 प्रतिशत हो गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
बैठक में स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. सुनिधि करोल ने बताया कि रीयल-टाइम निगरानी के लिए एनीमिया ट्रैकिंग वेब पोर्टल विकसित किया गया है। सभी ओपीडी में नियमित स्क्रीनिंग हो रही है। प्रभावी आईईसी (जागरूकता) सामग्री तैयार की गई है। मार्च और जुलाई में 86 हजार 24 मरीजों की फॉलो-अप एचबी जांच की गई, जिनमें 55.1 प्रतिशत में एचबी स्तर सुधरा और 22.7 प्रतिशत मरीजों का एचबी सामान्य हो गया।