बेटी ने पार्क में गाली सुनी तो बाप ने गाली बंद घर अभियान कर दिया शुरू, सवा लाख लोगों तक पहुंचा

Edited By Isha, Updated: 03 Jul, 2022 09:13 AM

the father started a closed house campaign

बेटी जींद की अर्बन एस्टेट कालोनी के पार्क में अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेलने गई तो वहां खेल-खेल में एक बच्ची ने उसे गाली जैसा शब्द बोल दिया। घर आकर बेटी ने इस शब्द के मायने अपने पिता सुनील जागलान से पूछे तो पिता सुनील जागलान ने बताया

जींद: बेटी जींद की अर्बन एस्टेट कालोनी के पार्क में अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेलने गई तो वहां खेल-खेल में एक बच्ची ने उसे गाली जैसा शब्द बोल दिया। घर आकर बेटी ने इस शब्द के मायने अपने पिता सुनील जागलान से पूछे तो पिता सुनील जागलान ने बताया कि यह एक गाली है। इसके बाद पिता सुनील जागलान ने खेल-खेल में और बिना किसी दुर्भावना के महिलाओं, बेटियों और बहनों के प्रति दी जाने वाली गालियां बंद करवाने के लिए गाली बंद घर नाम से बड़ा अभियान 5 महीने पहले शुरू किया। यह अभियान अब हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों में लगभग 1.25 लाख लोगों तक पहुंच चुका है।

सैल्फी विद डाटर अभियान के संयोजक जींद के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने 5 महीने पहले गाली बंद घर अभियान शुरू किया। इस अभियान में बच्चों से लेकर बड़ों को यह बताया जाता है कि वह मां, बहन या बेटी को लेकर कुछ ऐसे शब्द बात-बातों में या खेल-खेल में बोल देते हैं, जो महिलाओं के लिए अपमानजनक हैं। महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा की शुरूआत इसी से होती है। कब किसने बात-बातों में किसी को मां, बहन या बेटी की गाली निकाल दी, पता ही नहीं चलता लेकिन यह बहुत बुरा है। गाली बंद घर अभियान में यही बताया जाता है कि उन शब्दों का घर में किसी भी सूरत में इस्तेमाल नहीं किया जाए, जो मां, बहन या बेटी का किसी भी तरह से अपमान करने वाले हों। बाहर भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाए। सुनील जागलान बताते हैं कि 5 महीने में ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में सवा लाख से ज्यादा लोग गाली बंद घर अभियान से जुड?र अपने घरों में महिलाओं के प्रति गालियों को पूरी तरह बंद कर चुके हैं।

गाली मजाक में भी नहीं
बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच और गाली बंद घर अभियान के संयोजक सुनील जागलान बताते हैं कि मां, बहन और बेटी के प्रति कुछ गालियां लोगों की जुबान पर चढ़ी हुई हैं। कब उन्होंने ऐसी गाली दे दी, खुद गाली देने वाले को भी पता नहीं चलता। 
छोटे बच्चे इससे गालियां सीखते हंै। इस तरह की गालियों को पूरी तरह बंद करवाने के लिए घर में चार्ट लगवाए जा रहे हैं, जिनमें मां, बेटी और बहन के प्रति अपमानजनक शब्दों पर क्रॉस का निशान लगाकर यह बताया जा रहा है कि इस तरह के शब्द कहीं भी और कभी भी इस्तेमाल नहीं किए जाएं। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सीधे एक गंदी गाली है और गंदी गाली कभी नहीं देनी चाहिए। 

अभियान से जुड़े 8वीं और 9वीं कक्षा के बच्चे भी हाथ जोडर दूसरों को इस तरह की गालियां देने से रोक रहे हैं। गाली बंद घर अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आनलाइन ग्रुप बनाए गए हैं। आनलाइन सैशन लेकर गालियों को बंद करवाया जा रहा है। यूनिवर्सिटी से लेकर सोशल मीडिया और टॉक शो आदि आयोजित किए जा रहे हैं।

चार्ट में बता रहे मां ने कितनी और पापा ने कितनी गाली दी
गाली बंद घर अभियान के तहत घरों में बच्चे चार्ट लगाकर उस पर दर्ज कर रहे हैं कि दिन में मां ने कितनी और बाप ने कितनी गाली दी। गालियों की संख्या मां-बाप को बताकर बच्चे उन्हें इस तरह की गाली नहीं निकालने के लिए समझा रहे हंै। अभियान के संयोजक बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान का कहना है कि जब बच्चे माता-पिता को उनके द्वारा दी गई गालियों के बारे में बताते हैं तो माता-पिता शर्मिंदा होते हैं और उसके बाद घर में गाली बंद हो जाती है।

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