Edited By Krishan Rana, Updated: 06 Aug, 2026 02:08 PM

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में भारत के लगातार खराब प्रदर्शन और फीफा रैंकिंग में गिरावट का मुद्दा लोकसभा
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में भारत के लगातार खराब प्रदर्शन और फीफा रैंकिंग में गिरावट का मुद्दा लोकसभा में गूंजा। हालांकि, केंद्र सरकार ने फिलहाल भारतीय फुटबॉल के लिए किसी नई राष्ट्रीय विकास रणनीति या दीर्घकालिक रोडमैप की घोषणा करने से इनकार किया है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि फुटबॉल के विकास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) की है और केंद्र सरकार मौजूदा योजनाओं के माध्यम से उसे हरसंभव सहयोग उपलब्ध करा रही है।
यह विषय हिसार से कांग्रेस सांसद जयप्रकाश 'जेपी' ने लोकसभा में उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले तीन वर्षों में भारतीय फुटबॉल के प्रदर्शन में आई गिरावट और फीफा रैंकिंग में लगातार हुए नुकसान का क्या आकलन किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या फीफा विश्व कप और एएफसी एशियन कप जैसे बड़े लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कोई नई राष्ट्रीय फुटबॉल विकास नीति तैयार की जा रही है।
नई रणनीति पर सरकार ने नहीं दिया स्पष्ट संकेत
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने लिखित उत्तर में किसी नई फुटबॉल नीति या समयबद्ध राष्ट्रीय मिशन का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा कि देश में फुटबॉल के विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी एआईएफएफ की है और खेल मंत्रालय उसके साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है। सरकार के जवाब से यह संकेत मिला कि फिलहाल नई राष्ट्रीय रणनीति की बजाय मौजूदा ढांचे को ही मजबूत करने पर जोर रहेगा।
AIFF को मिल रही वित्तीय और तकनीकी सहायता
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना के तहत एआईएफएफ को खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, भारतीय और विदेशी कोचों की नियुक्ति, खेल विज्ञान, पोषण, चिकित्सा सुविधाओं, उपकरणों, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तथा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की तैयारियों के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। यह सहायता प्रत्येक वर्ष एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन (एसीटीसी) के आधार पर स्वीकृत की जाती है।
ग्रासरूट से एलीट स्तर तक प्रतिभा निखारने पर जोर
खेल मंत्री ने बताया कि 22 मई 2025 को राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना में संशोधन कर ग्रासरूट स्तर पर प्रतिभा खोज, पेशेवर कोचिंग, खेल विज्ञान और तकनीकी सहायता को अधिक प्राथमिकता दी गई है। फुटबॉल को खेलो इंडिया यूथ गेम्स, खेलो इंडिया अकादमियों और राज्य उत्कृष्टता केंद्रों से भी जोड़ा गया है ताकि युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकें।
साई केंद्रों में आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा
सरकार के अनुसार, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) अपने राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से फुटबॉल खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, फिटनेस, पोषण और चिकित्सा सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। सरकार का कहना है कि इन प्रयासों के जरिए भारतीय फुटबॉल की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है, हालांकि फिलहाल किसी नई राष्ट्रीय फुटबॉल विकास नीति की घोषणा नहीं की गई है।
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