सरकार के दावों से परे हैं शिक्षा और स्वास्थ्य के हालात: कुमारी सैलजा

Edited By Isha, Updated: 23 Jan, 2026 02:54 PM

state of education and healthcare is far worse than the government s claims

हरियाणा में बीते वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर अनेक घोषणाएँ की गईं। हर 20 किलोमीटर पर महाविद्यालय खोलने और प्रत्येक जिले में मेडिकल संस्थान विकसित करने जैसे दावे प्रमुख रहे

चंडीगढ़:  हरियाणा में बीते वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर अनेक घोषणाएँ की गईं। हर 20 किलोमीटर पर महाविद्यालय खोलने और प्रत्येक जिले में मेडिकल संस्थान विकसित करने जैसे दावे प्रमुख रहे। इन घोषणाओं का उद्देश्य निश्चित रूप से सराहनीय है, किंतु जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ अलग है। सच्चाई यह है कि इन क्षेत्रों में बुनियादी मानव संसाधन की कमी आज भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। यह बात सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने आज मीडिया को जारी एक बयान में कही।

सांसद सैलजा ने कहा कि सूचना के अधिकार के माध्यम से सामने आए तथ्यों के अनुसार हरियाणा प्रदेश के अनेक सरकारी महाविद्यालय नियमित प्रिंसिपल के बिना संचालित हो रहे हैं तथा बड़ी संख्या में सहायक प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं। कई विषयों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय स्तर पर भी अनेक स्कूल नियमित प्रधानाचार्यों के अभाव में कार्य कर रहे हैं, जहाँ शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार देकर व्यवस्था चलानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंता का विषय है। विभिन्न सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों तथा पैरामेडिकल स्टाफ के पद बड़ी संख्या में खाली हैं। इससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य ढांचा अपेक्षित दक्षता से कार्य नहीं कर पा रहा है। यह स्थिति तब और अधिक विचारणीय हो जाती है जब युवा वर्ग रोजगार की आशा लेकर आगे आता है, जबकि दूसरी ओर अनेक पद वर्षों से रिक्त पड़े रहते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि युवाओं में निराशा का भाव भी उत्पन्न होता है।

उन्होंने कहा कि आवश्यक है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों में केवल ढांचागत विस्तार से आगे बढक़र योग्य शिक्षकों व चिकित्सकों की नियमित नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। महाविद्यालय, विद्यालय, अस्पताल और मेडिकल संस्थान तभी प्रभावी बन सकते हैं जब उनमें पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षक, चिकित्सक और स्टाफ उपलब्ध हों। सांसद ने कहा कि राज्य के नागरिकों और विशेषकर युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपेक्षा है कि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देगी और प्राथमिकता के आधार पर रिक्त पदों को भरकर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

 
 

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