5 दिन बाद हरियाणा के टोहाना में मिली कोटा की पिंकी: बेटे ने बताई पहचान, बयाना के पुजारी और फेसबुक पोस्ट ने जोड़ी परिवार से कड़ी

Edited By Harman, Updated: 09 Jun, 2026 11:02 AM

pinky from kota found in tohana haryana after 5 days

राजस्थान के कोटा से 29 मई से लापता मंदबुद्धि महिला पिंकी और उसके 5 साल के बेटे नीरज का 5 दिन बाद हरियाणा के टोहाना में मिलन हो गया। भटकते-भटकते ये दोनों टोहाना के एक आश्रम में लावारिस हालत में पहुंच गए थे। भारत विकास परिषद और बयाना के माता...

टोहाना (सुशील सिंगला) : राजस्थान के कोटा से 29 मई से लापता मंदबुद्धि महिला पिंकी और उसके 5 साल के बेटे नीरज का 5 दिन बाद हरियाणा के टोहाना में मिलन हो गया। भटकते-भटकते ये दोनों टोहाना के एक आश्रम में लावारिस हालत में पहुंच गए थे। भारत विकास परिषद और बयाना के माता चिंतपूर्णी मंदिर के पुजारी पंडित दीपक शर्मा की सूझबूझ से टूटा हुआ परिवार फिर जुड़ गया।

भारत विकास परिषद के कुश भार्गव ने बताया कि 5 दिन पहले पुलिस ने महिला और बच्चे को आश्रम संचालिका रितु के सुपुर्द किया था। पिंकी अपना पता साफ नहीं बता पा रही थी। कभी खुद को जाखल की, कभी करौली की और कभी बयाना की बताती थी। लेकिन 4 साल के बेटे नीरज ने अपना पूरा नाम "नीरज कोहली शकवाल" बता दिया। बस यही नाम कड़ी बन गया।

फेसबुक पोस्ट से खुला रास्ता

कुश भार्गव के मुताबिक "कोहली शकवाल" राजस्थान के लेबर वर्ग में पाई जाने वाली जाति है। नेट पर सर्च करने पर बयाना और करौली का कनेक्शन मिला। इसके बाद भारत विकास परिषद ने फेसबुक पर पोस्ट डाली - "कोई बयाना से है क्या?" प्रभाकर कॉलोनी के वर्धमान मित्तल ने पोस्ट देखी और बयाना के पंडित दीपक शर्मा से संपर्क कराया। पंडित दीपक शर्मा टोहाना के माता चिंतपूर्णी मंदिर में सेवादार हैं, लेकिन मूल रूप से बयाना के रहने वाले हैं।

बयाना की बोली ने पक्की की पहचान

पंडित दीपक शर्मा आश्रम पहुंचे। उन्होंने बयाना की लोकल भाषा में बात की और "गांधी चौक", "कुंड आपे चलता है" जैसी बातों से महिला की पहचान पक्की कर ली। फिर अपने जानकार भूपेंद्र कोहली के जरिए फोटो भेजकर कोटा में महिला के भाई सचिन को ट्रेस किया।

सचिन ने बताया कि 29 मई से वे बहन को ढूंढ रहे थे। कोटा के आसपास और सोशल मीडिया पर सूचना दी, पर कोई सुराग नहीं मिला। पंडित दीपक का फोन आने पर पता चला कि बहन हरियाणा के टोहाना में है। कोटा से आकर सचिन ने बहन और भांजे को रिसीव किया। मिलन का पल भावुक कर देने वाला था। कुश भार्गव ने कहा, "20 साल में परिषद 125 से ज्यादा लोगों को परिवार से मिला चुकी है। बिछड़ा हुआ अपना मिल जाए, उससे बड़ा ईश्वरीय कार्य कुछ नहीं।" 

पंडित दीपक शर्मा बोले, "वर्धमान का फोन आया था। एक घंटे बात करते ही समझ गया कि ये बयाना की हैं। छोटी-छोटी कड़ियां जोड़कर भाई सचिन तक पहुंचे।" बयाना टोहाना से 456 किमी दूर है, पर सोशल मीडिया और मासूम नीरज की समझदारी ने मां-बेटे को घर पहुंचा दिया।
 

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