जींद परिषद की सीट बीजेपी के हिस्से आने से बागी हुए जजपा नेता, गठबंधन की बढ़ी मुश्किलें

Edited By Vivek Rai, Updated: 04 Jun, 2022 08:52 PM

jjp leaders rebelled due to bjp s share of jind parishad seat

नगरीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन जेजेपी नेता हरीश अरोड़ा के बगावती सुर खुलकर सामने आए। अरोड़ा का कहना है कि वे भाजपा के नेता के मुकाबले जींद में अच्छी पकड़ रखते हैं। इसलिए निर्दलीय ही सही लेकिन वे चुनाव जरूर लड़ेंगे।

जींद(अनिल): नगरीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन जेजेपी नेता हरीश अरोड़ा के बगावती सुर खुलकर सामने आए। अरोड़ा का कहना है कि वे भाजपा के नेता के मुकाबले जींद में अच्छी पकड़ रखते हैं। इसलिए निर्दलीय ही सही लेकिन वे चुनाव जरूर लड़ेंगे। हालांकि जींद नगर परिषद की सीट महिला के लिए आरक्षित होने के चलते अरोड़ा ने अपनी धर्मपत्नी रजनी अरोड़ा को नप प्रधान के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतारा है। बताया जा रहा है कि हरीश अरोड़ा को मानाने के लिए आज रात उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला जींद पहुंच सकते हैं।

जींद की सीट भाजपा के हिस्से आने से नाराज हैं जजपा नेता

बता दें कि पहले बीजेपी ने जजपा से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। तब जेजेपी ने जींद नगर परिषद से हरीश अरोड़ा की रजनी अरोड़ा को चेयरमैन पद के लिए आगे किया था। लेकिन जब बीजेपी ने अपने फैसले से यू-टर्न लेते हुए एक बार फिर से गठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। जींद परिषद बीजेपी के हिस्से में आने के चलते रजनी अरोड़ा का टिकट कट गया था। भाजपा की ओर से अनुराधा सैनी ने आज जींद नगर परिषद से नामांकन भरा है। इसलिए जेजेपी नेता ने अपनी धर्मपत्नी रजनी अरोड़ा को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरवाकर चुनाव में उतारा है। दिग्विज्य ने अरोड़ा को मनाने की भरपूर कोशिश की लेकिन अरोड़ा का कहना है कि मैं बीजेपी प्रत्याशी से मजबूत हूं। चाहे इसे लेकर सर्वे करवा लो। अरोड़ा को मनाने के लिए डिप्टी सीएम खुद आज रात जींद पहुंच सकते हैं।

गठबंधन की बैठक में भी नहीं पहुंचे हरीश अरोड़ा

आज जेजेपी कार्यालय में बीजेपी और जेजेपी नेताओं ने इकट्ठा होकर चुनाव के लिए रणनीति बनाई थी। जजपा से नाराज नेता हरीश अरोड़ा इस बैठक में भी शामिल नहीं हुए। मीटिंग में भाजपा के जिला प्रधान राजू मोर, विधायक कृष्ण मिड्ढा, पूर्व विधायक भाग सिंह छातर, कर्मपाल ढुल, बिट्टू जैन, कुलदीप रंधावा, ईश्वर उझानियां, राज सैनी, यशपाल बुढायन, कुलदीप मलिक, डॉ. सतबीर खटकड़, राजमल सैनी,गंगा सिंह रामराये, ओम ङ्क्षसह, सुभाष सैनी, बलबीर राणा, मोना पूर्व एमसी, यादवेंद्र खर्ब, राजेश सैन, कुलदीप गिल, जेएन भारद्वाज, कंवर रामपाल राणा, विकास सिहाग, हर्ष मित्तल व जिला पार्टी कार्यालय सचिव गुरदीप सांगवान मौजूद रहे। लेकिन हरीश अरोड़ा की गैर मौजूदगी से उनकी नाराजगी और ज्यादा साफ दिखाई दी।

गठबंधन के सीट फॉर्मूला ने बिगाड़ा खेल

बता दें कि भाजपा-जजपा गठबंधन के अनुसार 18 नगर परिषदों में से 14 पर भाजपा और 4 सीटों पर जजपा चुनाव लड़ रही है। नए गठबंधन के अनुसार जननायक जनता पार्टी के हिस्से टोहाना, नरवाना, मंडी डबवाली और नूंह नगर परिषद आई थी। जींद परिषद बीजेपी के हिस्से जाने के बाद ही हरीश अरोड़ा ने जेजेपी से बगावत करते हुए अपनी पत्नी को निर्दलीय प्रत्याशी बनाकर चुनाव में उतारने का कदम उठाया। उनके इस फैसले के चलते जेजेपी के लिए मुश्किल खड़ी हो गई हैं।

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