माननीयों के गोबर खाने के बयान पर भड़की जींद की खाप पंचायतें, सत्ता पक्ष और विपक्ष पर बरसे

Edited By Isha, Updated: 12 Mar, 2025 03:30 PM

jind s khap panchayats got angry on the statement

हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा और सफीदों से भाजपा विधायक रामकुमार गौतम के बीच मंगलवार को विधानसभा में हुए विवाद पर बुधवार को भी सदन में खूब हंगामा हुआ। रामकुमार गौतम द्वारा अरविंद

जींद: हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा और सफीदों से भाजपा विधायक रामकुमार गौतम के बीच मंगलवार को विधानसभा में हुए विवाद पर बुधवार को भी सदन में खूब हंगामा हुआ। रामकुमार गौतम द्वारा अरविंद शर्मा पर लगाए गए रुपयों के लेन-देन के आरोपों को गंभीर मुद्दा बताते हुए कांग्रेस ने जमकर बवाल काटा।


सदन में नारेबाजी भी हुई। पूर्व स्पीकर व बेरी विधायक डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने सदन की मर्यादा तोड़ने के लिए निंदा प्रस्ताव पास करने की मांग की। जनता द्वारा चुने गए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह पूरी तरह से अशोभनीय है। सामाजिक ताने-बाने को बिगड़ने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जिम्मेदार हैं।


यह बात जींद जिले की कंडेला खाप के प्रधान ओमप्रकाश कंडेला, माजरा खाप के प्रधान सरदार गुरविंदर सिंह और जुलाना खाप के प्रधान बसाऊ लाठर ने कही। खाप पंचायत के प्रधानों ने कहा कि विधानसभा में प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने अपनी ही पार्टी के विधायक पर गोबर खाने के आरोप लगाए और जवाब में विधायक ने मंत्री के बारे में जो कहा, उससे समाज में गिरावट ही आएगी।


माननीयों को इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती है। पहले ही असामाजिक कानूनों से सामाजिक तानाबाना बिगड़ रहा है। रही-सही कसर माननीय अपनी बेहद गिरी हुई और अमर्यादित भाषा से पूरी कर रहे हैं। माननीयों ने विधानसभा में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, उससे पूरा हरियाणा शर्मसार हुआ है।

 

ऐसे बयानों से युवा पीढ़ी में जो संदेश जा रहा है, उसकी कल्पना भी बयान देने वाले माननीय नहीं कर सकते। खापों के प्रधानों ने कहा कि लिव इन रिलेशनशिप जैसे असमाजिक कनूनों ने पहले ही समाज को गिरावट की तरफ धकेल दिया है। बड़े बुजुर्ग व्यक्ति निसहाय हो कर रह गई हैं । असमाजिक तत्वों को कानून मदद करता है।


कानून समाज के लिए होना चाहिए, समाज कानून के लिए नहीं। समाज का तानाबाना बिगाड़ने के लिए सता पक्ष व विपक्ष समान रुप जिम्मेदार हैं। सदन मे बेतुके गोबर खाने जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। क्या इसीलिए जनता ने इन माननीय को विधानसभा भेजा था। केवल खाफ पंचायतें ही इन असमाजिक कानूनों के खिलाफ बोलती हैं।

 
 

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